विजयीपुर में बाबा साहेब की प्रतिमा खंडित, मचा आक्रोश: सामाजिक सौहार्द बिगाड़ने की कोशिश का आरोप,
विजयीपुर/गोपालगंज। विजयीपुर थाना क्षेत्र में गुरुवार की देर रात बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर की प्रतिमा खंडित किए जाने का मामला सामने आने के बाद इलाके में आक्रोश का माहौल है। भुजौली खुर्द, भुजौली कला और मितुपुर के बीच स्थापित बाबा साहेब की प्रतिमा को रात करीब 12 बजे क्षतिग्रस्त किए जाने की सूचना मिलते ही स्थानीय लोग मौके पर पहुंचे और घटना की जानकारी पुलिस-प्रशासन को दी।
घटना के बाद बड़ी संख्या में ग्रामीणों की भीड़ जुट गई। स्थानीय लोगों ने इस कृत्य की कड़ी निंदा करते हुए दोषियों की जल्द पहचान कर गिरफ्तारी और कानून के तहत कठोर कार्रवाई की मांग की है। कुछ स्थानीय लोगों ने घटना के पीछे कथित तौर पर नफरत फैलाने वाली मानसिकता और सामाजिक सौहार्द बिगाड़ने की कोशिश का आरोप लगाया है। हालांकि, इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है और घटना की वास्तविक वजह पुलिस जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
सूचना मिलते ही पुलिस-प्रशासन पहुंचा मौके पर
घटना की जानकारी मिलते ही विजयीपुर प्रशासन सक्रिय हुआ। पुलिस निरीक्षक अभिषेक कुमार, अंचल अधिकारी और विजयीपुर थाना अध्यक्ष मौके पर पहुंचे तथा घटनास्थल का निरीक्षण किया। पुलिस ने आसपास के लोगों से जानकारी ली और पूरे मामले की जांच शुरू कर दी है।
प्रशासन की मौजूदगी में लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की गई। ग्रामीणों का कहना है कि घटना बेहद संवेदनशील है और किसी भी व्यक्ति को कानून हाथ में नहीं लेना चाहिए। लोगों ने पुलिस से निष्पक्ष जांच कर वास्तविक दोषियों को सामने लाने की मांग की है।
‘मूर्तियां तोड़ी जा सकती हैं, दिलों से बाबा साहेब की छवि नहीं’
घटना पर समाजसेवी मुरलीधर मिश्रा ने कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की। उन्होंने कहा कि बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर ने किसी एक व्यक्ति या वर्ग के लिए नहीं, बल्कि समतामूलक समाज और समान अधिकारों के लिए संघर्ष किया था।
उन्होंने कहा कि बाबा साहेब की प्रतिमा को क्षतिग्रस्त किए जाने से लोगों की भावनाएं निश्चित रूप से आहत होती हैं, लेकिन उनकी विचारधारा और लोगों के दिलों में उनकी छवि को मिटाया नहीं जा सकता। प्रतिमाएं तोड़ी जा सकती हैं और दोबारा बनाई जा सकती हैं, लेकिन बाबा साहेब के विचारों को समाप्त नहीं किया जा सकता।
मुरलीधर मिश्रा ने कहा कि यदि किसी की मंशा सामाजिक सद्भाव बिगाड़ने की है तो यह बेहद निंदनीय है। उन्होंने पुलिस से ऐसे अराजक तत्वों की पहचान कर तत्काल कार्रवाई करने और दोषियों को कड़ी सजा दिलाने की मांग की।
मुखिया की चुप्पी पर स्थानीय लोगों ने उठाए सवाल
घटना के बाद जगदीशपुर पंचायत की मुखिया फूलपतिया देवी, जो अनुसूचित जाति समाज से आती हैं, उनकी भूमिका को लेकर भी स्थानीय स्तर पर सवाल उठने लगे हैं।स्थानीय जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों का कहना है कि बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर की प्रतिमा खंडित किए जाने जैसी संवेदनशील घटना के बाद पंचायत प्रतिनिधि की ओर से स्पष्ट प्रतिक्रिया और पहल अपेक्षित थी, लेकिन लोगों के अनुसार इस मामले में अब तक मुखिया की ओर से सार्वजनिक रूप से कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। हालांकि खबर लिखे जाने तक मुखिया की चुप्पी पर स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई थी!
जनता ने दिखाई समझदारी, प्रशासन को बुलाकर कराई जांच
इस पूरे घटनाक्रम में स्थानीय लोगों की भूमिका भी चर्चा में है। प्रतिमा खंडित किए जाने के बाद लोगों ने आक्रोश के बावजूद किसी तरह का कानून अपने हाथ में नहीं लिया। लोगों ने तत्काल पुलिस और प्रशासन को सूचना दी तथा जांच की मांग की।
स्थानीय लोगों का कहना है कि सामाजिक तनाव पैदा करने या नफरत फैलाने की किसी भी कोशिश को जनता समझ चुकी है। यही वजह रही कि लोगों ने आपसी विवाद बढ़ाने के बजाय प्रशासन को बुलाकर मामले की जांच कराने का रास्ता चुना।
ग्रामीणों का कहना है कि महापुरुष किसी जाति या समुदाय विशेष तक सीमित नहीं होते। बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर के विचार समानता, न्याय और अधिकारों से जुड़े हैं। इसलिए उनकी प्रतिमा को नुकसान पहुंचाना केवल एक प्रतिमा को क्षति पहुंचाने का मामला नहीं, बल्कि समाज की भावनाओं को आहत करने वाला कृत्य है।
‘महापुरुषों की प्रतिमा तोड़कर इतिहास नहीं मिटाया जा सकता’
घटना की कांग्रेस के प्रखंड अध्यक्ष प्रणेश्वर कुमार तिवारी उर्फ मनोज तिवारी ने भी कड़ी निंदा की। उन्होंने कहा कि महापुरुषों की प्रतिमाएं तोड़ने से उनका इतिहास और योगदान समाप्त नहीं किया जा सकता।
उन्होंने घटना को बेहद निंदनीय बताते हुए प्रशासन से अपील की कि सामाजिक सौहार्द बिगाड़ने वाले तत्वों की पहचान कर उनके खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाए। उन्होंने कहा कि समाज के किसी भी वर्ग को भड़काने या आपसी भाईचारा खराब करने की कोशिश को किसी भी कीमत पर सफल नहीं होने देना चाहिए।
विजयीपुर में महापुरुषों की प्रतिमाओं की सुरक्षा पर बड़ा सवाल
घटना के बाद एक बड़ा सवाल यह भी उठ रहा है कि विजयीपुर क्षेत्र में महापुरुषों की प्रतिमाओं की सुरक्षा आखिर कितनी प्रभावी है? स्थानीय लोगों का कहना है कि इससे पहले भी संत रविदास और बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर जैसे महापुरुषों की प्रतिमाओं को नुकसान पहुंचाने की घटनाएं चिंता का विषय रही हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि ऐसी घटनाओं पर समय रहते सख्त कार्रवाई नहीं हुई तो असामाजिक तत्वों का मनोबल बढ़ सकता है। लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि सार्वजनिक स्थानों पर स्थापित महापुरुषों की प्रतिमाओं की सुरक्षा व्यवस्था पर भी ध्यान दिया जाए और संवेदनशील स्थानों पर निगरानी बढ़ाई जाए।
अब पुलिस जांच पर टिकी निगाहें
फिलहाल पुलिस मामले की जांच में जुटी है। घटनास्थल का निरीक्षण किया जा चुका है और पुलिस आसपास के लोगों से पूछताछ कर रही है। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि बाबा साहेब की प्रतिमा को किसने और किन परिस्थितियों में क्षतिग्रस्त किया?
स्थानीय लोगों की मांग स्पष्ट है—दोषी चाहे कोई भी हो, उसकी पहचान हो, गिरफ्तारी हो और कानून के तहत कठोर कार्रवाई हो।
क्योंकि प्रतिमाएं भले ही पत्थर की हों, लेकिन उनसे जुड़ी भावनाएं और महापुरुषों के विचार पूरे समाज की धरोहर हैं। ऐसी घटनाओं का जवाब किसी विवाद या टकराव से नहीं, बल्कि कानून, न्याय और सामाजिक एकता से दिया जाना चाहिए।












