नौतन के सभी गांवों में धूमधाम से मनाई गई श्रीकृष्ण जन्माष्टमी
मंदिरों में गूंजे भजन-कीर्तन, आधी रात को हुआ श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव
नौतन से फिरोज अंसारी की रिपोर्ट
प्रखंड क्षेत्र के विभिन्न गांवों में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का पर्व गुरुवार को श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया गया। इस अवसर पर गांवों के मंदिरों और पूजा पंडालों को आकर्षक ढंग से सजाया गया। दिनभर श्रद्धालुओं ने भगवान श्रीकृष्ण की पूजा-अर्चना की तथा शाम होते ही मंदिरों में भजन-कीर्तन और धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन शुरू हो गया। आधी रात को भगवान श्रीकृष्ण के जन्म के साथ ही श्रद्धालुओं ने जयकारे लगाए और एक-दूसरे को जन्माष्टमी की बधाई दी। धार्मिक मान्यता के अनुसार, द्वापर युग में मथुरा के राजा कंस के अत्याचार से प्रजा त्रस्त थी। कंस को आकाशवाणी हुई कि उसकी बहन देवकी की आठवीं संतान उसका वध करेगी। इसके बाद कंस ने देवकी और उनके पति वसुदेव को कारागार में बंद कर दिया। देवकी की छह संतानों का कंस ने वध कर दिया, जबकि सातवीं संतान बलराम को योगमाया की कृपा से रोहिणी के गर्भ में पहुंचा दिया गया। भाद्रपद कृष्ण पक्ष की अष्टमी की मध्यरात्रि में कारागार में देवकी के गर्भ से भगवान श्रीकृष्ण का जन्म हुआ। मान्यता है कि उनके जन्म लेते ही कारागार के द्वार खुल गए और पहरेदार गहरी नींद में सो गए। भगवान के आदेश पर वसुदेव उन्हें टोकरी में रखकर यमुना पार गोकुल पहुंचे और वहां नंद बाबा के घर जन्मी कन्या के साथ श्रीकृष्ण को बदल दिया। सुबह होते ही गोकुल में नंद के घर आनंद छा गया। इसी खुशी में आज भी जन्माष्टमी पर श्रद्धालु भगवान श्रीकृष्ण के जन्म का उत्सव मनाते हैं। नौतन में भी देर रात तक मंदिरों में पूजा-अर्चना और भजन-कीर्तन का दौर चलता रहा।












