गोपालगंज में स्वास्थ्य सेवाएं ठप होने के आसार: वेतन रोकने के विरोध में 15 से 17 जून तक डॉक्टरों का OPD कार्य बहिष्कार!
गोपालगंज ब्यूरो आशिष रंजन श्रीवास्तव की रिपोर्ट
गोपालगंज।। बिहार के गोपालगंज जिले से इस वक्त की सबसे बड़ी खबर सामने आ रही है, जहां स्वास्थ्य व्यवस्था पूरी तरह से चरमराने वाली है। लंबित वेतन भुगतान और बायोमेट्रिक उपस्थिति के नाम पर प्रताड़ित किए जाने के विरोध में जिले के सरकारी डॉक्टरों ने आर-पार की लड़ाई का ऐलान कर दिया है। बिहार स्वास्थ्य सेवा संघ (भासा), गोपालगंज की बैठक के बाद चिकित्सकों ने आगामी 15 जून से 17 जून तक तीन दिवसीय ओपीडी (OPD) कार्य के पूर्ण बहिष्कार का निर्णय लिया है। इस संबंध में भासा ने सिविल सर्जन (CS) को लिखित अल्टीमेटम सौंप दिया है। इस तीन दिवसीय आंदोलन के कारण जिले के लगभग सभी मुख्य सरकारी अस्पतालों में मरीजों को ओपीडी सेवाओं के लिए भटकना पड़ सकता है। हड़ताल का असर निम्नलिखित स्तरों पर दिखेगा:- सदर अस्पताल, गोपालगंज, सभी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (PHC), सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC), रेफरल अस्पताल शामिल है। डॉक्टरों के इस बड़े कदम के पीछे मुख्य वजह है – बायोमेट्रिक विधि द्वारा उपस्थिति दर्ज करने के बहाने गोपालगंज जिले के सभी चिकित्सकों का वेतन रोक कर रखा गया है, जिससे डॉक्टरों में भारी आक्रोश है। संघ का कहना है कि बिहार सरकार के आदेश के मुताबिक बायोमेट्रिक की यह व्यवस्था केवल 5 और 6 दिवसीय कार्यालयों के लिए लागू की गई है। इसके बावजूद, सिविल सर्जन द्वारा इसे जबरन 24×7 (24 घंटे सातों दिन) कार्य व्यवस्था वाले अस्पतालों पर थोपा जा रहा है। इस विषय में बिहार स्वास्थ्य सेवा संघ द्वारा राज्य सरकार से भी लगातार वार्ता की जा रही है, लेकिन स्थानीय स्तर पर वेतन रोके जाने के कारण डॉक्टर अब सड़क पर उतरने को मजबूर हैं।
भासा के पदाधिकारियों ने साफ लफ्जों में चेतावनी दी है कि तीन दिवसीय ओपीडी कार्य बहिष्कार के कारण आम जनता और मरीजों को होने वाली किसी भी प्रकार की परेशानी और असुविधा की पूर्ण जवाबदेही सिविल सर्जन और बिहार सरकार की होगी। भासा गोपालगंज के सचिव और उपाध्यक्ष के हस्ताक्षरित इस पत्र की प्रतिलिपि जिला पदाधिकारी (DM) गोपालगंज, सचिव (स्वास्थ्य विभाग, बिहार सरकार) और माननीय स्वास्थ्य मंत्री (बिहार सरकार) को भी सादर सूचनार्थ भेज दी गई है ताकि इस गंभीर स्थिति पर तुरंत संज्ञान लिया जा सके। अब देखना यह होगा कि जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग इस हड़ताल को टालने के लिए क्या कदम उठाता है, अन्यथा 15 जून से जिले के हजारों मरीजों को भारी किल्लत का सामना करना पड़ सकता है।











