बांदा : पपरेंदा के पास बिना वैध रॉयल्टी लगा भारी बालू डंप, खनिज विभाग की चुप्पी पर उठे सवाल
बांदा। जनपद में अवैध खनन और बालू कारोबार एक बार फिर चर्चा के केंद्र में है। इस बार मामला पपरेंदा क्षेत्र के पास लगाए गए भारी भरकम बालू डंप का है, जहां बिना वैध रॉयल्टी के सैकड़ों ट्रकों की बालू जमा किए जाने की बात सामने आ रही है। स्थानीय लोगों और सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार यह डंप महीनों पहले से धीरे-धीरे तैयार किया जा रहा था, लेकिन खनिज विभाग की ओर से अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है, जिससे विभागीय कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
सूत्रों का दावा है कि क्षेत्र में बालू का डंप लंबे समय से किया जा रहा था और रात के समय लगातार ट्रकों की आवाजाही देखी जाती रही। बताया जा रहा है कि अब जब मामला चर्चा में आया है तो अलग-अलग स्थानों से रॉयल्टी “मैनेज” करने की कवायद शुरू हो गई है, जिससे पूरे मामले में बड़े स्तर पर राजस्व गड़बड़ी की आशंका जताई जा रही है।
स्थानीय स्तर पर यह डंप मोनू अंसारी के नाम से जुड़ा बताया जा रहा है, हालांकि आधिकारिक रूप से इसकी पुष्टि नहीं हो सकी है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि जितनी भारी मात्रा में बालू का भंडारण किया गया है, उसके मुकाबले वैध रॉयल्टी का कोई स्पष्ट रिकॉर्ड सामने नहीं आया। ऐसे में यह संदेह गहरा रहा है कि वास्तविक खनन स्रोत और राजस्व विवरण कहीं न कहीं छिपाया जा रहा है।
कई अहम सवाल खड़े
मामले ने कई गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए हैं—
आखिर इतनी बड़ी मात्रा में बालू किस खदान से लाई गई?
सैकड़ों ट्रकों की आवाजाही के बावजूद निगरानी तंत्र कैसे निष्क्रिय रहा?
किसके संरक्षण या इशारे पर महीनों तक डंप तैयार होता रहा?
अब जिन स्थानों से रॉयल्टी समायोजित की जा रही है, वहां की वास्तविक बालू और सरकारी राजस्व का क्या हुआ? बांदा से सनम कीरिपोर्ट











