“तल्ख़ है कितना सुख से जीना पूंछ ये हम फनकारों से,
हम सब लोहा काट रहे हैं कागज़ की तलवारों से ।”
दुखद समाचार
बांदा का भी एक पत्रकार मयंक शुक्ला पुलिस माफिया गठजोड़ का शिकार होकर काल के गाल में समा गया। सिर्फ दबी खबर को उजागर करने का गुनाह था इस पत्रकार का, और नतीजे में पुलिस को गुमराह करके माफिया ने रंगदारी का फर्जी मुकदमा दर्ज कर दिया, नतीजा ये हुआ कि इस बेबस कलमकार को हार्ट अटैक आया और मयंक चिरनिंद्रा में लीन हो गया। ईश्वर दिवंगत आत्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान दे और शोकाकुल परिवार को धैर्य प्रदान करे
ॐ शांति शांति शांति 🙏











