लंबित योजनाओं पर प्रशासन सख्त, भूमि से लेकर निर्माण तक हर अड़चन दूर करने का आदेश
गोपालगंज ब्यूरो | आशिष रंजन श्रीवास्तव की रिपोर्ट
गोपालगंज। जिले में विकास योजनाओं को निर्धारित समयसीमा में धरातल पर उतारने को लेकर जिला प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। मंगलवार को समाहरणालय सभाकक्ष में आयोजित जिला समन्वय समिति (विकास) की बैठक में मुख्यमंत्री प्रगति यात्रा के दौरान ली गई योजनाओं समेत विभिन्न विकास कार्यों की विस्तृत समीक्षा की गई। जिला पदाधिकारी ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिया कि योजनाओं के क्रियान्वयन में किसी भी स्तर पर अनावश्यक देरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
बैठक में योजनाओं की लक्ष्य के विरुद्ध प्रगति, भूमि की उपलब्धता, एनओसी, तकनीकी स्वीकृति, निविदा और निर्माण कार्यों में आ रही बाधाओं की समीक्षा की गई। डीएम ने निर्देश दिया कि जिन योजनाओं में किसी कारण से काम रुका हुआ है, उन्हें चिह्नित कर संबंधित विभाग आपसी समन्वय से तत्काल समाधान निकालें।
बैठक में उप विकास आयुक्त गौरव कुमार, अपर समाहर्ता राजेश्वरी पाण्डेय, वन विभाग के पदाधिकारी सहित जिला स्तरीय अधिकारी मौजूद रहे। सभी प्रखंडों के पदाधिकारी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से बैठक से जुड़े।
भूमि के कारण नहीं रुके विकास कार्य
जिला पदाधिकारी ने भूमि अनुपलब्धता वाली योजनाओं को प्राथमिकता से निपटाने का निर्देश दिया। वैकल्पिक भूमि की तलाश, एनओसी और भूमि विवाद से जुड़े मामलों का शीघ्र समाधान करने को कहा गया। आंगनबाड़ी केंद्रों के निर्माण में 280 के लक्ष्य के विरुद्ध 259 मामलों में भूमि उपलब्ध कराने एवं एनओसी की प्रक्रिया से संबंधित जानकारी दी गई।
डीएम ने अधिकारियों को स्पष्ट किया कि भूमि और एनओसी की प्रक्रिया अनावश्यक रूप से लंबित नहीं रहनी चाहिए, ताकि निर्माण कार्य समय पर शुरू हो सके।
आंगनबाड़ी शौचालय निर्माण की भी समीक्षा
आंगनबाड़ी केंद्रों पर शौचालय निर्माण के लिए कुल 210 का लक्ष्य रखा गया है। इनमें 42 केंद्रों पर कार्य शुरू हो चुका है, जबकि 103 केंद्रों पर कार्य शुरू करने की स्थिति बताई गई। करीब 40 मामलों में भूमि विवाद, भूमि अनुपलब्धता अथवा अन्य कारणों से बाधा सामने आई।
डीएम ने निर्देश दिया कि जिन योजनाओं में कोई बाधा नहीं है, उन्हें प्राथमिकता के आधार पर तेजी से पूरा कराया जाए।
तकनीकी पदाधिकारियों को फील्ड मॉनिटरिंग का आदेश
बैठक में निर्माणाधीन योजनाओं की गुणवत्ता और कार्य की गति पर विशेष जोर दिया गया। तकनीकी पदाधिकारियों एवं प्रोजेक्ट मॉनिटरिंग ग्रुप को नियमित रूप से स्थल निरीक्षण कर योजनाओं की वास्तविक प्रगति की निगरानी करने का निर्देश दिया गया।
सड़क निर्माण की विभिन्न योजनाओं में सीसी, बिटुमिनस, सबग्रेड समेत अन्य कार्यों की प्रगति की भी समीक्षा की गई। अधिकारियों को निर्देश दिया गया कि तकनीकी स्वीकृति, प्राक्कलन, निविदा और निर्माण के किसी भी चरण में अनावश्यक विलंब न हो।
मुख्यमंत्री प्रगति यात्रा की योजनाओं पर रहेगी विशेष नजर
बैठक में मुख्यमंत्री प्रगति यात्रा के दौरान ली गई योजनाओं को सर्वोच्च प्राथमिकता देने का निर्देश दिया गया। प्रत्येक योजना की वर्तमान स्थिति की नियमित मॉनिटरिंग और अद्यतन रिपोर्ट जिला स्तर पर उपलब्ध कराने को कहा गया।
डीएम ने अधिकारियों से कहा कि योजनाओं की समीक्षा केवल कागजी रिपोर्ट तक सीमित न रहे, बल्कि जमीन पर वास्तविक प्रगति दिखाई देनी चाहिए। भूमि, तकनीकी या प्रशासनिक स्तर पर आने वाली प्रत्येक बाधा की पहचान कर उसका शीघ्र समाधान सुनिश्चित किया जाए।
86 पंचायत सरकार भवनों की समीक्षा
पंचायत सरकार भवनों की समीक्षा में कुल 86 योजनाओं में 47 पूर्ण और 39 योजनाएं प्रगति पर बताई गईं। कुछ योजनाएं भूमि विवाद एवं न्यायालयी मामलों के कारण प्रभावित हैं। ऐसे मामलों में नियमानुसार कार्रवाई करने तथा जहां संभव हो वैकल्पिक भूमि उपलब्ध कराने की प्रक्रिया तेज करने का निर्देश दिया गया।
राजस्व मामलों के निष्पादन में तेजी का निर्देश
भूमि एवं राजस्व से जुड़े लंबित मामलों की भी समीक्षा की गई। रिपोर्ट के अनुसार 2,901 पुराने लंबित मामलों के अलावा वर्ष 2026-27 में 3,228 नए वाद दर्ज हुए, जबकि 3,556 वादों का निष्पादन किया गया। कुल निष्पादन प्रतिशत 95 प्रतिशत रहा।
कृषि में 99.71 प्रतिशत आच्छादन
कृषि विभाग की समीक्षा में खरीफ 2026-27 के लिए निर्धारित 1,23,721.758 हेक्टेयर लक्ष्य के विरुद्ध 1,23,371.62 हेक्टेयर में आच्छादन दर्ज किया गया, जो 99.71 प्रतिशत है। धान का आच्छादन 101.17 प्रतिशत और गन्ने का 100 प्रतिशत रहा।
डीएम ने कृषि विभाग को उपलब्धि की इस गति को बनाए रखने, किसानों को योजनाओं का लाभ समय पर दिलाने और लगातार निगरानी सुनिश्चित करने का निर्देश दिया।
अधिकारियों की तय होगी जिम्मेदारी
बैठक के अंत में जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया कि प्रत्येक विभाग अपने स्तर पर लंबित योजनाओं की सूची तैयार करेगा। योजना में देरी के कारण की पहचान, संबंधित विभाग से समन्वय और समाधान की कार्रवाई की जिम्मेदारी संबंधित अधिकारियों की होगी।
डीएम ने साफ संदेश दिया कि विकास योजनाओं में देरी अब स्वीकार नहीं होगी—अधिकारी समन्वय बनाएं, अड़चन दूर करें और योजनाओं को समय पर धरातल पर उतारें।












