बांग्लादेश में हिंदू युवक की निर्मम हत्या और हिंदू समाज पर लक्षित हिंसा अस्वीकार्य-विश्व हिन्दू परिषद
बड़हरिया से परमानंद पांडे की रिपोर्ट


बांग्लादेश में अल्पसंख्यक हिन्दू दीपू दास की निर्मम हत्या के विरोध मे सिवान में विश्व हिन्दू परिषद और बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने सिवान में विरोध मार्च निकला। विरोध मार्च के बाद पत्रकार को संबोधित करते हुए विश्व हिंदू परिषद बजरंग दल के क्षेत्र संयोजक जन्मेजय कुमार ने बांग्लादेश के मैमनसिंह गांव निवासी अल्पसंख्यक एक हिंदू युवक दीपु चंद्रदास की भीड़ द्वारा पुलिस थाना से खींच कर की गई निर्मम हत्या की कड़े शब्दों में निंदा की और गहरा दुःख व्यक्त किया। उन्होंने बताया कि गुरुवार रात कथित ईशनिंदा के आरोपों के बाद इस जघन्य घटना को अंजाम दिया गया। जबकि मृतक दीपू पर ईश नंदा का आरोप साबित नहीं हो सका है।
जन्मेजय कुमार ने कहा कि रिपोर्टों के अनुसार दीपु चंद्र दास ने यह लिखा था कि “सभी भगवान अलग-अलग नामों से पुकारे जाते है लेकिन सभी एक ही हैं।” इसे ईशनिंदा करार दिया गया और इसी कारण उसे जिंदा जला दिया गया। उन्होंने कहा कि ऐसी सोच अत्यंत खतरनाक है, क्योंकि यह भारत में धर्मनिरपेक्षता की बुनियाद को ही चुनौती देती है। उन्होंने सवाल उठाया कि स्वयं को धर्मनिरपेक्ष बताने वाली भारत के राजनेता, पार्टियां और जन सरोकार वाली शक्तियाँ, अंतरराष्ट्रीय मीडिया के कुछ वर्ग और विश्वभर के मानवाधिकार मंच इस मुद्दे पर पूरी तरह मौन क्यों हैं। उन्होंने आगे कहा कि निर्वासित बांग्लादेशी लेखिका एवं मानवाधिकार कार्यकर्ता तस्लिमा नसरीन ने सार्वजनिक रूप से बताया है कि दीपु चंद्र दास पर झूठा ईशनिंदा का आरोप लगाया गया था और पुलिस संरक्षण में होने के बावजूद उसे उग्र भीड़ के हवाले करके मरने के लिए बंगलादेश की पुलिस ने छोड़ दिया गया। आलोक कुमार ने कहा कि बांग्लादेश इस समय अनिश्चितता, अराजकता और कानूनविहीनता के गंभीर दौर से गुजर रहा है। इस भयावह वातावरण में कट्टरपंथी और उग्रवादी तत्वों ने हिंदुओं, सिखों और अन्य अल्पसंख्यक समुदायों के खिलाफ बेलगाम हिंसा शुरू कर दी है। एक हिंदू युवक की यह अमानवीय हत्या कोई अकेली घटना नहीं है, बल्कि पूरे बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों के खिलाफ बढ़ती असुरक्षा, भय और व्यवस्थित उत्पीड़न का भयावह प्रतिबिंब है। उन्होंने जोर देकर कहा कि यह स्थिति पूरी दुनिया के लिए गंभीर चिंता का विषय है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय का यह नैतिक और मानवीय दायित्व है कि वह बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों की सुरक्षा और मानवाधिकारों की रक्षा के लिए तत्काल और प्रभावी कदम उठाए। जन्मेजय कुमार ने आगे कहा कि ऐसे हालात में भारत मूक दर्शक बना नहीं रह सकता और नही भी रहना चाहिए। भारत की परंपरा रही है कि वह दुनिया भर में उत्पीड़ित और पीड़ित समुदायों के साथ खड़ा रहा है। विश्व हिंदू परिषद भारत सरकार से आग्रह करती है कि वह बांग्लादेश में हिंदुओं और अन्य अल्पसंख्यकों की सुरक्षा, सम्मान और गरिमा सुनिश्चित करने के लिए सभी संभव कूटनीतिक, राजनीतिक और मानवीय उपाय करे। उन्होंने स्पष्ट रूप से बंगलादेश के कार्यवाहक प्रधानमंत्री मुहम्मद यूनुस को प्रदान किए गए नोबेल शांति पुरस्कार को तत्काल वापस लेने की मांग की। उन्होंने कहा कि जो नेतृत्व अल्पसंख्यकों की रक्षा करने और कानून-व्यवस्था बनाए रखने में विफल रहता है, उसे अंतरराष्ट्रीय मान्यता या वैधता का कोई नैतिक अधिकार नहीं है। उन्होंने इस बात की भी कड़ी निंदा की कि मुहम्मद यूनुस ने शरीफ उस्मान हादी को राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार दिया, जिसने पहले फेसबुक पर तथाकथित “ग्रेटर बांग्लादेश” का मानचित्र साझा कर भारत को खुली चुनौती दी थी—जिसमें भारत के सात पूर्वोत्तर राज्य, पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के कुछ हिस्से शामिल दिखाए गए थे। विश्व हिंदू परिषद को ऐसे तत्वों के प्रति कोई सहानुभूति नहीं है। सिवान के गांधी मैदान से हजारों कार्यकर्ताओं के साथ बांग्लादेश के प्रधानमंत्री का पुतला दहन का कार्यक्रम जेपी चौक पर संपन्न हुआ। इस कार्यक्रम में मुख्य रूप से बजरंग क्षेत्र संयोजक जन्मेजय कुमार,प्रांत विमर्श प्रमुख रितेश सिंह जी, विश्व हिन्दू परिषद जिला मंत्री परमेश्वर जी, बजरंग दल जिला संयोजक रंजन सिंह विहिप सह मंत्री सुधाकर जी , बजरंग दल नगर संयोजक धनंजय कुमार, प्रमोद सिंह प्रखंड संयोजक मैरवा , अभिनंदन दुबे , विशाल कुमार , धनु कुमार सचिन कुमार, विराज , सन्नी , रिषु कुमार , राहुल कुमार, मुन्ना यादव, मोहन गुप्ता , अभिषेक गुप्ता, लव दुवे , सचिन शाह,कवीन्द्र कुमार, आदित्य कुमार, शिव , भोला कुमार, एवं अन्य हज़ारों कार्यकर्ता मौजूद थे।












