AB-NEWS
  • होम
  • देश
  • दुनिया
  • राजनीति
  • टेक्नोलॉजी
  • खेल
  • मनोरंजन
  • व्यापार / बिज़नेस
  • शिक्षा
  • स्वास्थ्य
  • कैरियर
No Result
View All Result
  • होम
  • देश
  • दुनिया
  • राजनीति
  • टेक्नोलॉजी
  • खेल
  • मनोरंजन
  • व्यापार / बिज़नेस
  • शिक्षा
  • स्वास्थ्य
  • कैरियर
No Result
View All Result
AB-NEWS
No Result
View All Result
Home देश

गोपालगंज: पिता की हत्या का 4 साल बाद हिसाब, बाप-बेटे को मिली उम्रकैद की सजा।

Abhinay Abhinay by Abhinay Abhinay
April 28, 2026
in देश
0
गोपालगंज: पिता की हत्या का 4 साल बाद हिसाब, बाप-बेटे को मिली उम्रकैद की सजा।
0
SHARES
2
VIEWS
Share on FacebookShare on Twitter

गोपालगंज: पिता की हत्या का 4 साल बाद हिसाब, बाप-बेटे को मिली उम्रकैद की सजा।

न्याय की जीत: 2022 के खूनी संघर्ष में ADJ-9 की अदालत ने सुनाया ऐतिहासिक फैसला; दोषियों पर लगा भारी जुर्माना।

गोपालगंज ब्यूरो आशिष रंजन श्रीवास्तव की रिपोर्ट

गोपालगंज।। ‘देर है पर अंधेर नहीं’, यह कहावत गोपालगंज में चरितार्थ हुई है जहाँ चार साल पहले अपने पिता को खोने वाले एक बेटे को आखिरकार न्याय मिल गया है। भोरे थाना क्षेत्र के रखबाही गांव में हुए चर्चित हत्याकांड में मंगलवार को अपना फैसला सुनाते हुए अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश (ADJ-9) राकेश रंजन सिंह की अदालत ने बाप-बेटे को उम्रकैद की सजा सुनाई है।

क्या था मामला?
यह घटना 26 अप्रैल 2022 की है। रखबाही गांव में मामूली विवाद ने उस वक्त रौद्र रूप ले लिया था जब नशे में धुत विजय खटीक ने दरवाजे पर बैठे बुजुर्ग के साथ गाली-गलौज शुरू कर दी। विरोध करने पर विजय और उसके पिता मजिस्टर खटीक ने लाठी-डंडों और धारदार हथियार (पसहुली) से जानलेवा हमला कर दिया। इस हमले में बुजुर्ग की मौके पर ही मौत हो गई थी, जबकि परिवार के अन्य सदस्य लहूलुहान हो गए थे। अपर लोक अभियोजक (APP) हरेंद्र प्रताप सिंह की प्रभावी पैरवी और ठोस सबूतों के आधार पर अदालत ने विजय खटीक और मजिस्टर खटीक को दोषी करार दिया। सोमवार (27 अप्रैल) को सजा का ऐलान करते हुए कोर्ट ने निम्नलिखित दंड निर्धारित किए:
IPC धारा 302 (हत्या): उम्रकैद और ₹50,000 का अर्थदंड।
IPC धारा 307 (हत्या का प्रयास): 10 वर्ष का सश्रम कारावास और ₹20,000 का अर्थदंड।
IPC धारा 324 (जानलेवा हथियार से चोट): 3 वर्ष का सश्रम कारावास और ₹5,000 का अर्थदंड।
अदालत ने आदेश दिया कि अर्थदंड की कुल राशि का आधा हिस्सा पीड़ित परिवार को मुआवजे के तौर पर दिया जाएगा। जुर्माना न भरने की स्थिति में दोषियों को 3 साल की अतिरिक्त जेल काटनी होगी।
साक्ष्यों के अभाव में अदालत ने महिला आरोपी इंद्रावती देवी को निर्दोष पाते हुए बाइज्जत बरी कर दिया है। फैसले के बाद दोषियों को तुरंत न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया। इस फैसले से पीड़ित परिवार ने राहत की सांस ली है और न्यायपालिका के प्रति अपना विश्वास जताया है। गाँव में किसी भी अप्रिय घटना को रोकने के लिए प्रशासन अलर्ट मोड पर है।

“यह फैसला समाज में एक कड़ा संदेश है कि कानून के हाथ लंबे होते हैं और अपराध करने वाला चाहे कोई भी हो, वह सजा से बच नहीं सकता।” — हरेंद्र प्रताप सिंह, अपर लोक अभियोजक

Abhinay Abhinay

Abhinay Abhinay