डीएवी के शिक्षकों के मांग का विभिन्न शिक्षक संघों ने किया समर्थन, प्राचार्य पर कार्रवाई करने की मांग की
सीवान से फिरोज अंसारी की रिपोर्ट
डीएवी पीजी कॉलेज के प्राचार्य डॉ रामानंद राम के द्वारा महिला शिक्षिकाओं का उत्पीड़न, भ्रष्टाचार और मनमानी को लेकर शिक्षकों का आंदोलन तेज होते जा रहा है। जेपीयू कुलपति प्रो परमेंद्र कुमार वाजपेई के आदेश पर प्रो पूनम सिंह के नेतृत्व में गठित आंतरिक शिकायत समिति के समक्ष डीएवी कॉलेज की छह शिक्षिकाओं ने अपना बयान रिकॉर्ड करा चुकी हैं तथा अपने बयान के समर्थन में साक्ष्य भी प्रस्तुत कर चुकी हैं। भूगोल के विभागाध्यक्ष डॉ प्रभाकर निषाद ने बताया कि प्राचार्य के असंवैधानिक कार्यों को लेकर कुलपति और कुलाधिपति को कई आवेदन भेजे गए हैं, जिसमें से पांच आवेदनों पर राज्यपाल सचिवालय से जेपीयू कुलसचिव को आवश्यक कार्रवाई करने का निर्देश दिया गया है। लेकिन कार्रवाई नहीं होने से प्राचार्य की अब भी मनमानी जारी है। इधर विश्वविद्यालय द्वारा नियुक्त इनकम बर्सर प्रो पंकज कुमार और एक्सपेंडिचर बर्सर डॉ सत्येंद्र कुमार सिंह ने जेपीयू कुलसचिव को लिखे पत्र में प्राचार्य द्वारा मनमाने तरीके से सैलरी डिमांड को बर्सर से हस्ताक्षरित किए बिना भेजने पर कड़ा ऐतराज जताया है। दोनों बर्सर ने कहा कि किसी भी कर्मचारी से स्पष्टीकरण का अवसर दिए बिना और बिना कार्यालय आदेश के उसका सैलरी रोकना या काटना नेचुरल जस्टिस और वित्तीय नियमों की घोर अवहेलना है। डीएवी कॉलेज के शिक्षकों के आंदोलन को अन्य कॉलेज के शिक्षक संघों का समर्थन मिलना शुरू हो गया है। कमला राय कॉलेज और महेंद्र महिला शिक्षक संघ ने शिक्षकों की मांगों का समर्थन करते हुए कुलपति से तुरंत कार्रवाई की मांग की है।
जीपीयू स्नातकोत्तर शिक्षक संघ के सचिव डॉ अभय कुमार सिंह, राजेंद्र कॉलेज शिक्षक संघ के सचिव डॉ प्रशांत कुमार सिंह, जगलाल चौधरी कॉलेज शिक्षक संघ के अध्यक्ष डॉ दिनेश पाल, गंगा सिंह कॉलेज के सचिव डॉ संतोष कुमार सिंह, जयप्रकाश महिला कॉलेज की सचिव डॉ सोनाली सिंह, जगदम कॉलेज के सचिव डॉ राजमोहन शर्मा, नंदलाल कॉलेज के सचिव प्रो राकेश कुमार, राजा सिंह कॉलेज के प्रो मनोज कुमार सिंह ने प्राचार्य पर कार्रवाई करने की मांग जीपीयू कुलपति से की है। डीएवी पीजी कॉलेज शिक्षक संघ के अध्यक्ष डॉ धनंजय यादव और सचिव पवन कुमार ने कहा कि प्राचार्य के विरुद्ध गंभीर आरोप लगे हैं। एक निश्चित समय सीमा के अंदर इंक्वायरी कराकर कुलपति महोदय को कार्रवाई सुनिश्चित करनी चाहिए।










