इलाज के दौरान एक वर्षीय मासूम की मौत, परिजनों ने डॉक्टर पर लापरवाही का लगाया आरोप
शिवी हॉस्पिटल से कैलाश हॉस्पिटल ले जाने और परिजनों को समय पर जानकारी न देने का दावा, जांच की मांग
बांदा। शहर में करीब एक वर्षीय मासूम की इलाज के दौरान मौत के बाद परिजनों ने चिकित्सकीय लापरवाही के गंभीर आरोप लगाए हैं। परिजनों के मुताबिक बच्चा शुरुआत में बुखार की शिकायत के चलते शिवी हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया था और भर्ती होने के बाद वह सामान्य रूप से खेल-कूद एवं बातचीत कर रहा था। अगले दिन अचानक उसकी तबीयत बिगड़ने के बाद उसे कैलाश हॉस्पिटल ले जाया गया, जहां कुछ घंटे बाद परिजनों को उसकी मौत की जानकारी दी गई।
परिजनों के अनुसार, बच्चे को बुखार होने पर शिवी हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया था। उनका कहना है कि भर्ती होने के बाद शाम तक बच्चा सामान्य था और बातचीत कर रहा था। अगले दिन सुबह भी वह परिजनों से बात कर रहा था। इसी दौरान अचानक उसके सिर में दर्द हुआ और उसकी हालत बिगड़ने लगी।
परिजनों का आरोप है कि इसी दौरान इलाज कर रहे डॉ. आदित्य मिश्रा द्वारा बच्चे को इंजेक्शन लगाए गए। उनका कहना है कि इंजेक्शन लगाए जाने के बाद बच्चे की हालत अचानक गंभीर हो गई और वह असामान्य हरकतें करने लगा। हालत बिगड़ने पर डॉ. आदित्य मिश्रा बच्चे को स्वयं कैलाश हॉस्पिटल लेकर पहुंचे। परिजनों के अनुसार उन्हें तत्काल यह जानकारी नहीं दी गई कि बच्चे को दूसरे अस्पताल ले जाया जा रहा है।
परिजनों का कहना है कि बाद में उन्हें कैलाश हॉस्पिटल में बच्चे के भर्ती होने की जानकारी मिली। वहां बच्चे को ICU/OT में रखे जाने की बात सामने आई। परिजनों ने चिकित्सकों से बच्चे को किसी अन्य अस्पताल ले जाने की इच्छा जताई, लेकिन उनके अनुसार उन्हें ऐसा करने से मना कर दिया गया। परिजनों का दावा है कि उनसे कहा गया कि बच्चे के ठीक होने की संभावना यहीं है और उसे कहीं और ले जाने की जरूरत नहीं है।
परिजनों के मुताबिक करीब ढाई घंटे अथवा कुछ घंटों बाद उन्हें बताया गया कि बच्चे की मौत हो चुकी है। परिवार का आरोप है कि बच्चे की वास्तविक स्थिति और अस्पताल ले जाए जाने की जानकारी उन्हें समय पर नहीं दी गई। परिजनों ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराए जाने और यदि किसी स्तर पर चिकित्सकीय लापरवाही सामने आती है तो संबंधित जिम्मेदारों के खिलाफ कार्रवाई किए जाने की मांग की है।
परिजनों द्वारा लगाए गए आरोपों के बाद मामले में यह सवाल भी उठ रहा है कि बच्चे की हालत अचानक क्यों बिगड़ी, उसे लगाए गए इंजेक्शन कौन से थे, उसे शिवी हॉस्पिटल से कैलाश हॉस्पिटल क्यों रेफर किया गया और बच्चे को दूसरे अस्पताल ले जाने की अनुमति क्यों नहीं दी गई। इन सभी बिंदुओं की वास्तविक स्थिति मेडिकल रिकॉर्ड और जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
समाचार लिखे जाने तक डॉ. आदित्य मिश्रा एवं संबंधित अस्पताल प्रबंधन का पक्ष प्राप्त नहीं हो सका है। उनका पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।
नोट: यह समाचार परिजनों द्वारा बताए गए घटनाक्रम और लगाए गए आरोपों पर आधारित है। चिकित्सकीय लापरवाही अथवा मौत के वास्तविक कारण की आधिकारिक पुष्टि जांच एवं चिकित्सकीय अभिलेखों के आधार पर ही होगी।
बांदा से
सनम मलिक की रिपोर्ट












