पंचायत विकास दिवस: गोपालगंज के मांझा में पहुंचे प्रभारी सचिव और डीएम, धरातल पर योजनाओं को परखने के लिए ग्रामीणों से किया सीधा संवाद।
गोपालगंज ब्यूरो आशिष रंजन श्रीवास्तव की रिपोर्ट

गोपालगंज : बिहार सरकार के निर्देशानुसार प्रत्येक माह के अंतिम रविवार को आयोजित होने वाले “पंचायत विकास दिवस” के तहत आज गोपालगंज जिले की सभी ग्राम पंचायतों में व्यापक और गरिमामयी कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। इसी कड़ी में मांझा प्रखंड के मांझा पश्चिमी पंचायत भवन में एक भव्य और असरदार कार्यक्रम आयोजित हुआ, जिसमें सूबे के शीर्ष अधिकारियों ने सीधे जनता के बीच पहुंचकर विकास की रफ्तार का जायजा लिया।गोपालगंज-सह-सचिव, राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग, बिहार श्री जय सिंह (भा०प्र०से०) मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। उनके साथ जिला पदाधिकारी श्री समीर सौरभ (भा०प्र०से०), उप विकास आयुक्त श्री गौरव कुमार (भा०प्र०से०) और अपर समाहर्ता श्रीमती राजेश्वरी पाण्डेय सहित जिले के तमाम विभागों के आला अधिकारी, कर्मचारी और भारी संख्या में स्थानीय ग्रामीण मौजूद रहे। योजनाओं की ऑन-द-स्पॉट समीक्षा: पंचायत स्तर पर चल रही विभिन्न विकासात्मक और लोक-कल्याणकारी योजनाओं की प्रगति को बारीक से परखा गया।सीधा जनसंवाद: अधिकारियों ने ग्रामीणों से आमने-सामने बात कर उनकी समस्याओं को सुना और उनके बहुमूल्य सुझावों को डायरी में दर्ज किया। पारदर्शिता पर फोकस: सरकारी लाभ को बिना किसी बिचौलिए के सीधे पात्र लाभुकों तक पहुंचाने की रणनीति पर जोर दिया गया। कार्यक्रम के दौरान मंच से अधिकारियों ने न केवल जनता की सुध ली, बल्कि संबंधित कर्मियों को सख्त हिदायत भी दी। “पंचायत स्तर पर संचालित हर योजना में पूर्ण पारदर्शिता होनी चाहिए। जनहित के कार्यों को समयबद्ध तरीके से पूरा करना हमारी पहली प्राथमिकता है। विकास का लाभ समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति तक पहुंचना ही इस आयोजन का असली मकसद है।”
— श्री जय सिंह (भा०प्र०से०), जिला प्रभारी सचिव
वहीं, जिले के कमान संभाल रहे जिलाधिकारी श्री समीर सौरभ ने मातहत अधिकारियों को निर्देशित करते हुए कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों की वास्तविक आवश्यकताओं और भौगोलिक स्थिति के अनुरूप ही विकास योजनाओं का खाका तैयार किया जाए, ताकि जनभागीदारी को और अधिक मजबूत किया जा सके। “पंचायत विकास दिवस” के मौके पर मांझा पश्चिमी पंचायत भवन में सुबह से ही उत्सव जैसा माहौल था। ग्रामीणों का कहना था कि जब सरकार के इतने बड़े अधिकारी खुद चलकर उनके दरवाजे पर आते हैं, तो न केवल समस्याओं का तेजी से समाधान होता है, बल्कि व्यवस्था के प्रति उनका विश्वास भी मजबूत होता है। इस सफल आयोजन ने एक बार फिर साबित किया है कि “प्रशासन आपके द्वार” की नीति से ही ग्रामीण बिहार की तस्वीर और तकदीर बदली जा सकती है












