नौतन में सौहार्दपूर्ण माहौल में निकला मुहर्रम का जुलूस
नौतन से फिरोज अंसारी की रिपोर्ट
स्थानीय प्रखंड क्षेत्र में शुक्रवार को हिन्दू-मुस्लिम एकता का प्रतीक मुहर्रम का जुलूस शांति और सौहार्द के साथ निकला, जिसमें चारों तरफ देशभक्ति का रंग भी नजर आया । आपसी भाइचारे के इस जुलूस में हिन्दू-मुस्लिम दोनों समुदाय के लोग एकता की मिसाल पेश करते हुए ताजिया को कंधा लगाने से लेकर जुलूस एवं खेल में भी हिस्सा लेते नजर आए। ज्यादातर जुलूसों में तिरंगा लहराता हुआ दिखाई दिया। गौरतलब है कि मुहर्रम इस्लामी हिजरी सन् का पहला महीना है, जिसमें इमाम हुसैन शहीद हुए थे । उनकी शहादत की याद में तथा उनके मकबरे के प्रतीक के तौर पर ताजिया बनाया जाता है। इस परंपरा की शुरुआत बादशाह तैमूर लंग द्वारा भारत से ही की गई थी । इसके बाद ख्वाजा मुईनुद्दीन चिश्ती जब भारत आए, तो उन्होंने अजमेर में एक इमामबाड़ा बनवाया और उसमें ताजिया रखने की एक जगह भी बनाई । तभी से ताजिया और जुलूस की ये परंपरा चली आ रही है । लोग अपनी मन्नतें पूरी करने के उद्देश्य से या फिर पूरी होने पर ताजिया बनाते हैं। वहीं मन्नतें पूरी होने पर विभिन्न समुदायों के लोग अपने बच्चों व युवाओं को हुसैनी सैनिक के प्रतिक के तौर पर हादरा बनते हैं, जो क्षेत्र के इमामबाड़ों का भ्रमण करते हुए कर्बला तक जाते हैं। इन्हीं परंपराओं के तहत नौतन में शांति और सौहार्द के साथ यह त्यौहार संपन्न हो गया। इस दौरान अंचलाधिकारी शशि कुमारी तथा थाना प्रभारी जितमोहन कुमार पूरे दल-बल के साथ क्षेत्र में शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए पूरी तरह से मुस्तैद नजर आए ।












