सरकार बदली, लेकिन नहीं बदली इमलिया की सड़क,विधानसभा चुनाव से पहले जारी हुई योजना, चुनाव बाद गायब हुआ पत्रांक
5–6 गांवों की जीवनरेखा बनी बदहाल सड़क, ग्रामीणों का फूटा गुस्सा
- ‘ सड़क नहीं तो वोट नहीं’—इमलिया के ग्रामीणों ने दी आंदोलन की चेतावनी ग्रामीण विकास मंत्री के क्षेत्र में बदहाल सड़क, बरसात में पैदल चलना भी मुश्किल भोरे/गोपालगंज
बिहार में विधानसभा चुनाव हो गए, सरकार बदल गई, लेकिन गोपालगंज जिले के भोरे प्रखंड की डूमर पंचायत के वार्ड संख्या-18 स्थित इमलिया गांव की नहर वाली सड़क की तस्वीर आज भी जस की तस बनी हुई है। बरसात शुरू होते ही सड़क की स्थिति इतनी खराब हो गई है कि पैदल चलना भी लोगों के लिए मुश्किल हो गया है।
ग्रामीणों का कहना है कि विधानसभा चुनाव के दौरान इसी सड़क को लेकर भारी आक्रोश था। उस समय तत्कालीन भोरे विधायक एवं वर्तमान ग्रामीण विकास मंत्री सुनील कुमार के स्तर से मुख्यमंत्री ग्रामीण निधि योजना के तहत सड़क के ईंटीकरण एवं मिट्टीकरण के लिए पत्रांक जारी होने की बात कही गई थी। लेकिन चुनाव समाप्त होने के बाद वह प्रस्ताव आखिर किस फाइल में दब गया, इसका जवाब आज तक किसी अधिकारी या जनप्रतिनिधि के पास नहीं है।
बताया जाता है कि इस सड़क से लगभग पांच से छह गांवों के लोगों का प्रतिदिन आवागमन होता है। बरसात के दिनों में सड़क पूरी तरह कीचड़ में तब्दील हो जाती है। साइकिल, बाइक और चारपहिया वाहन तो दूर, पैदल चलना भी जोखिम भरा हो गया है। इससे स्कूली बच्चों, किसानों, मरीजों और आम ग्रामीणों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
इधर पंचायत चुनाव नजदीक आते ही ग्रामीणों का आक्रोश फिर से खुलकर सामने आने लगा है। कई ग्रामीणों ने साफ कहा है कि यदि चुनाव से पहले सड़क निर्माण शुरू नहीं हुआ तो स्थानीय जनप्रतिनिधियों का विरोध किया जाएगा। कुछ लोगों ने तो यहां तक चेतावनी दी है कि उन्हें जूते-चप्पलों की माला पहनाकर विरोध दर्ज कराया जाएगा तथा पूरे गांव में मतदान बहिष्कार पर भी विचार किया जाएगा।
ग्रामीणों का सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब विधानसभा चुनाव से पहले सड़क निर्माण के लिए पत्रांक जारी हुआ था, तो आखिर वह योजना कहां चली गई? क्या वह फाइलों में दबकर रह गई, या फिर केवल चुनावी घोषणा बनकर रह गई? ग्रामीण यह भी सवाल उठा रहे हैं कि वर्तमान में ग्रामीण विकास मंत्री बनने के बाद भी इस सड़क के निर्माण को लेकर कोई पहल क्यों नहीं हुई। कहीं ऐसा तो नहीं कि कागजों में योजना पूरी दिखा दी गई और धरातल पर काम शुरू ही नहीं हुआ?
अब देखना होगा कि प्रशासन और जनप्रतिनिधि ग्रामीणों की इस गंभीर समस्या पर कब तक ध्यान देते हैं, या फिर एक और चुनाव इसी बदहाल सड़क के सहारे गुजर जाएगा।












