गोपालगंज-भोजपुर में सुलग रहा है आक्रोश! भरत तिवारी ‘एनकाउंटर’ को लेकर सड़क पर उतरा जनसैलाब, ‘फर्जी मुठभेड़’ के खिलाफ विशाल न्याय मार्च
गोपालगंज ब्यूरो आशिष रंजन श्रीवास्तव की रिपोर्ट
गोपालगंज/भोजपुर: भरत तिवारी एनकाउंटर मामले को लेकर जनता का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया है। पुलिसिया कार्रवाई के खिलाफ लोगों का आक्रोश इस कदर फूटा कि सड़कों पर जनसैलाब उमड़ पड़ा। इस कथित एनकाउंटर को “फर्जी” करार देते हुए हजारों की संख्या में लोगों ने एक विशाल न्याय मार्च निकाला और प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। प्रदर्शनकारियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं का साफ कहना है कि यह एनकाउंटर नहीं, बल्कि सीधे तौर पर हत्या है।’यह एनकाउंटर नहीं, हत्या है’— सामाजिक कार्यकर्ताओं की दो टूक
न्याय मार्च का नेतृत्व कर रहे स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ताओं और आक्रोशित नागरिकों ने सीधे तौर पर पुलिस महकमे को कठघरे में खड़ा किया है। प्रदर्शन के दौरान एक प्रमुख सामाजिक कार्यकर्ता ने तीखे तेवरों में कहा:”हमारा रुख बिल्कुल साफ है। हमारी मांग है कि इस कथित फर्जी एनकाउंटर में शामिल सभी पुलिसकर्मियों के खिलाफ तुरंत हत्या का मुकदमा (IPC/BNS के तहत) दर्ज किया जाए। सिर्फ जांच का दिलासा देकर मामले को रफा-दफा नहीं होने दिया जाएगा। दोषी पुलिसकर्मियों को फौरन गिरफ्तार और निलंबित किया जाए। सड़क पर उतरे लोगों ने प्रशासन के सामने अपनी मांगों की एक लंबी फेहरिस्त रखी है, जिस पर वे तुरंत एक्शन चाहते हैं: पूरे एनकाउंटर मामले की सीबीआई (CBI) या किसी स्वतंत्र न्यायिक संस्था से निष्पक्ष जांच कराई जाए। एनकाउंटर टीम में शामिल सभी पुलिस अधिकारियों और कर्मियों पर हत्या की धाराओं में एफआईआर (FIR) दर्ज हो। आरोपी पुलिसकर्मियों को सेवा से तुरंत निलंबित कर जेल भेजा जाए। पीड़ित परिवार को सुरक्षा और उचित मुआवजा दिया जाए।इस विशाल न्याय मार्च के बाद से गोपालगंज और भोजपुर के सीमावर्ती इलाकों में स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है। मार्च को देखते हुए प्रशासन ने भारी संख्या में पुलिस बल की तैनाती कर दी है। जनता का स्पष्ट संदेश है कि जब तक दोषियों पर त्वरित और सख्त कार्रवाई नहीं होती, तब तक यह आंदोलन थमने वाला नहीं है। अब देखना यह है कि चौतरफा दबाव और जनता के इस भारी आक्रोश के बाद सरकार और पुलिस के आला अधिकारी क्या रुख अपनाते हैं। क्या भरत तिवारी के परिवार को इंसाफ मिलेगा, या यह मामला भी फाइलों में दफन होकर रह जाएगा?











