एमडीएम नहीं बना तो भूखे लौटे बच्चे, बदहाल व्यवस्था ने खोली शिक्षा तंत्र की पोल
— भोजन की आस में आते हैं बच्चे स्कूल, प्रधान शिक्षक समेत एक शिक्षक अनुपस्थित—
सीतामढ़ी।शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव (एसीएस), जिला शिक्षा पदाधिकारी (डीईओ) सीतामढ़ी राघवेन्द्र मणि त्रिपाठी एवं मध्याह्न भोजन योजना (एमडीएम) के जिला कार्यक्रम पदाधिकारी (डीपीओ) द्वारा लगातार सख्ती और निर्देश के बावजूद जिले के कई सरकारी विद्यालयों की व्यवस्था में कोई ठोस सुधार नजर नहीं आ रहा है। शिक्षकों की कार्यशैली और विद्यालय प्रबंधन की लापरवाही अब भी जस की तस बनी हुई है। इसका ताजा उदाहरण प्रखंड क्षेत्र के मध्य विद्यालय, कन्या कन्हौली में देखने को मिला, जहां शिक्षा व्यवस्था पूरी तरह बदहाल दिखी।
पत्रकारों की एक टीम जब शुक्रवार को उक्त विद्यालय का जायजा लेने पहुंची, तो कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। निरीक्षण के दौरान यह स्पष्ट हुआ कि विद्यालय में पढ़ाई-लिखाई से ज्यादा बच्चों की उपस्थिति मध्याह्न भोजन (एमडीएम) पर निर्भर है। स्थानीय अभिभावकों और शिक्षकों के अनुसार, अधिकांश बच्चे सिर्फ भोजन के लालच में ही स्कूल आते हैं, और जब एमडीएम नहीं बनता, तो वे बिना पढ़ाई किए ही घर लौट जाते हैं।
बिना सूचना के प्रधान शिक्षक नदारद
निरीक्षण के दौरान विद्यालय में शिक्षक कपिलेश्वर पंडित एवं शिक्षिका सरिता कुमारी उपस्थित पाई गईं। शिक्षक राजेश कुमार एवं शिक्षिका सीमा कुमारी के अवकाश पर होने की जानकारी दी गई। लेकिन सबसे गंभीर बात यह रही कि प्रधान शिक्षक अनिल कुमार एवं एक अन्य शिक्षक बिना किसी पूर्व सूचना या अवकाश स्वीकृति के विद्यालय से अनुपस्थित पाए गए। इससे विद्यालय संचालन पर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है।
बुनियादी सुविधाओं का घोर अभाव
सात कमरों वाले इस विद्यालय में केवल एक शौचालय है, जिसकी स्थिति भी संतोषजनक नहीं बताई गई। पीने के पानी के लिए लगाया गया बोरिंग लंबे समय से खराब पड़ा हुआ है। कागजों में आरओ (RO) की सुविधा दर्शायी गई है, लेकिन वह भी मौके पर पूरी तरह बेकार नजर आई। इससे छात्राओं को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
दो दिनों से नहीं बना एमडीएम
सबसे चिंताजनक स्थिति यह रही कि गुरुवार की तरह शुक्रवार को भी विद्यालय में एमडीएम के तहत भोजन नहीं बनाया गया। विद्यालय में लगभग 150 बच्चे नामांकित हैं, लेकिन बदहाल व्यवस्था और भोजन नहीं मिलने के कारण बच्चों की उपस्थिति लगातार घटती जा रही है।
शिक्षक कपिलेश्वर पंडित ने बताया कि शुक्रवार को केवल आठ से दस बच्चे ही स्कूल पहुंचे थे। जैसे ही बच्चों को यह जानकारी मिली कि आज भी एमडीएम नहीं बना है, वे सभी बच्चे बिना कक्षा में बैठे ही घर लौट गए।
अभिभावकों में नाराजगी
विद्यालय की स्थिति को लेकर अभिभावकों में भी गहरी नाराजगी देखी गई। उन्होंने बताया कि स्कूल का संचालन पूरी तरह भगवान भरोसे चल रहा है। न नियमित पढ़ाई होती है, न समय पर शिक्षक उपस्थित रहते हैं और न ही बच्चों को मिलने वाली मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं।
शिक्षा विभाग पर उठे सवाल
घटना ने एक बार फिर शिक्षा विभाग की निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। विभागीय अधिकारियों की सख्ती और निरीक्षण के बावजूद अगर विद्यालयों की स्थिति ऐसी बनी हुई है, तो यह सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन पर गंभीर चिंता का विषय है।
अब देखना यह होगा कि इस मामले में शिक्षा विभाग क्या कार्रवाई करता है और क्या दोषी शिक्षकों एवं विद्यालय प्रबंधन पर कोई ठोस कदम उठाया जाता है या फिर यह मामला भी अन्य मामलों की तरह फाइलों में ही दबकर रह जाएगा।












