मुख्यमंत्री उद्यमी योजना से खड़ी हुई गारमेंट इकाई बनी 65 जीविका दीदियों की आजीविका का आधार
गोपालगंज ब्यूरो | आशिष रंजन श्रीवास्तव की रिपोर्ट
गोपालगंज। अगर सपनों को सरकारी योजना का सहारा और मेहनत को सही दिशा मिल जाए, तो गांव की मिट्टी से भी सफलता की बड़ी कहानी लिखी जा सकती है। उचकागांव प्रखंड के लूहसी गांव स्थित यश इंटरप्राइजेज आज इसी बदलाव की मिसाल बनकर सामने आया है। मुख्यमंत्री उद्यमी योजना के सहयोग से शुरू हुई रेडीमेड गारमेंट इकाई ने देखते ही देखते करीब 80 लाख रुपये सालाना कारोबार का मुकाम हासिल कर लिया है।
इस सफलता की सबसे खास बात यह है कि यश इंटरप्राइजेज की तरक्की सिर्फ एक उद्यमी की कहानी नहीं है, बल्कि इसने 65 जीविका दीदियों के लिए रोजगार का दरवाजा खोल दिया है। गांव में चल रही सिलाई मशीनें अब सिर्फ कपड़े नहीं, बल्कि महिलाओं के आत्मनिर्भर बनने और परिवारों की आर्थिक मजबूती की कहानी भी बुन रही हैं।
कपड़ों के साथ बुनी जा रही आत्मनिर्भरता की कहानी
घर-परिवार की जिम्मेदारियों के बीच जीविका दीदियों को गांव में ही काम का अवसर मिलना इस पहल की बड़ी उपलब्धि है। स्थानीय स्तर पर रोजगार मिलने से महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत होने का मौका मिला है। वहीं, एक छोटे उद्यम के विस्तार ने यह साबित कर दिया कि स्वरोजगार की शुरुआत आगे चलकर कई परिवारों के लिए रोजगार का माध्यम बन सकती है।
डीएम ने जाना सफलता का सफर
जिला पदाधिकारी श्री समीर सौरभ ने गुरुवार को यश इंटरप्राइजेज पहुंचकर इकाई का निरीक्षण किया। उन्होंने गारमेंट तैयार करने की पूरी प्रक्रिया और इकाई की कार्यप्रणाली को करीब से देखा। उद्यमी से उत्पादन, विपणन, कारोबार के विस्तार और रोजगार सृजन की जानकारी ली।
डीएम ने मुख्यमंत्री उद्यमी योजना से मिले सहयोग और उसके व्यवसाय पर पड़े प्रभाव की भी समीक्षा की। उन्होंने इकाई के सफल संचालन तथा 65 जीविका दीदियों को रोजगार उपलब्ध कराने की पहल की सराहना की।
एक उद्यम, 65 परिवारों के लिए उम्मीद
जिला पदाधिकारी ने कहा कि ऐसे उद्यमों की उपयोगिता केवल स्वरोजगार तक सीमित नहीं रहती। जब एक व्यवसाय आगे बढ़ता है और उसके साथ दूसरे परिवारों के लिए भी आजीविका के अवसर पैदा होते हैं, तो उसका लाभ पूरे क्षेत्र को मिलता है। उन्होंने इस पहल को अन्य लोगों के लिए भी अनुकरणीय बताया।
उन्होंने संबंधित अधिकारियों को उद्यमिता को बढ़ावा देने, मुख्यमंत्री उद्यमी योजना का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करने तथा स्थानीय स्तर पर अधिक से अधिक रोजगार के अवसर सृजित करने के निर्देश दिए।
लूहसी से मिल रहा आत्मनिर्भर बिहार का संदेश
लूहसी की यह गारमेंट इकाई यह संदेश दे रही है कि सरकारी योजना, उद्यमिता और मेहनत का सही मेल हो तो गांव में भी बड़ा कारोबार खड़ा किया जा सकता है। मुख्यमंत्री उद्यमी योजना के माध्यम से स्थापित ऐसी इकाइयां स्थानीय महिलाओं को रोजगार और स्वरोजगार से जोड़ने के साथ-साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था और औद्योगिक गतिविधियों को भी गति दे रही हैं।
निरीक्षण के दौरान जिला उद्योग केंद्र के महाप्रबंधक आयुष कुमार, उचकागांव के प्रखंड विकास पदाधिकारी सहित अन्य संबंधित अधिकारी मौजूद रहे।











