शिक्षा मंत्री को बर्खास्त करो, राष्ट्रीय परिक्षा एजेंसी को भंग करो— भाकपा माले
भोरे/गोपालगंज
दिल्ली में शिक्षा मंत्री के इस्तीफे और राष्ट्रीय परिक्षा एजेंसी को भंग करने की मांग को लेकर चल रहे आंदोलन के समर्थन में आज भाकपा (माले) भोरे अंचल कमिटी के नेतृत्व में पार्टी कार्यालय से चारमोहानी तक आक्रोश मार्च सह अर्थी जुलूस निकाला गया। प्रदर्शनकारियों ने शिक्षा मंत्री का प्रतीकात्मक पुतला और अर्थी लेकर सरकार के खिलाफ जोरदार नारेबाजी की तथा शिक्षा व्यवस्था को बर्बाद करने वाली नीतियों के खिलाफ अपना आक्रोश व्यक्त किया।
आक्रोश मार्च का नेतृत्व भाकपा (माले) जिला कमिटी सदस्य सह मुखिया कमलेश प्रसाद, राघव प्रसाद सिंह, धर्मेंद्र चौहान, अर्जुन सिंह, एल. बी. सिंह, किसान नेता बजरंग बली कुशवाहा, इंकलाबी नौजवान सभा (इनौस) नेता मृत्युंजय कुमार सिंह, सुरेश मौर्य, रवींद्र सिंह, विश्वनाथ गुप्ता, शिवजी बीन, विद्या खरवार, सोनू पटेल, मंजीत कुमार गुप्ता, ज्ञानमती, रामदेयाल बीन सहित अनेक नेताओं और कार्यकर्ताओं ने किया।
चारमोहानी पर आयोजित सभा को संबोधित करते हुए भाकपा (माले) अंचल सचिव सुबास पटेल, कमलेश प्रसाद, धर्मेंद्र चौहान, राघव प्रसाद सिंह, अर्जुन सिंह एवं विद्या खरवार ने कहा कि देश की शिक्षा व्यवस्था गंभीर संकट से गुजर रही है। शिक्षा को लगातार निजीकरण और व्यावसायीकरण की ओर धकेला जा रहा है, जिससे गरीब, दलित, पिछड़े, आदिवासी तथा मेहनतकश परिवारों के बच्चों के लिए गुणवत्तापूर्ण शिक्षा हासिल करना कठिन होता जा रहा है।
वक्ताओं ने कहा कि नीट परिक्षा पेपर लीक सहित तमाम परिक्षाओं का परिक्षा पेपर लीक के जिम्मेदार शिक्षा मंत्री के इस्तीफे और अवैधानिक राष्ट्रीय परिक्षा एजेंसी को भंग करने, न ई शिक्षा नीति को खत्म करने की मांग को लेकर चल रहा आंदोलन, शिक्षा व्यवस्था में व्याप्त भ्रष्टाचार, अनियमितताओं और जनविरोधी नीतियों के खिलाफ जनता के बढ़ते आक्रोश की अभिव्यक्ति है। सरकार जनता के सवालों का जवाब देने के बजाय विरोध की आवाज को दबाने की कोशिश कर रही है, लाठी बरसाई जा रहीं हैं। 23 दिनों तक अनशन पर बैठे छात्रों से वर्ता नहीं कर रहे हैं।जिसे भाकपा (माले) और छात्र युवा किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं करें।
सभा ने मांग की कि शिक्षा व्यवस्था में व्याप्त सभी गड़बड़ियों की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की जाए, शिक्षा मंत्री नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए तत्काल इस्तीफा दें तथा देशभर में समान, गुणवत्तापूर्ण, वैज्ञानिक और लोकतांत्रिक शिक्षा व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।
अंत में नेताओं ने घोषणा की कि यदि शिक्षा पर हो रहे हमले, निजीकरण और जनविरोधी नीतियां वापस नहीं ली गईं तो भाकपा (माले) जनता और छात्र-युवाओं के साथ मिलकर आंदोलन को और व्यापक बनाएगी।











