राजकीय डिग्री कॉलेज में जेपी जयंती पर संगोष्ठी आयोजित , ‘संपूर्ण क्रांति’ और लोकतांत्रिक मूल्यों पर हुई चर्चा
नौतन से फिरोज अंसारी की रिपोर्ट
लोकनायक जयप्रकाश नारायण की जयंती के अवसर पर रविवार, 11 अक्टूबर 2026 को राजकीय डिग्री महाविद्यालय, नौतन, सीवान में ‘जयप्रकाश नारायण की वैचारिकी और प्रासंगिकता’ विषय पर संगोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में वक्ताओं ने जेपी के विचारों, उनके सामाजिक एवं राजनीतिक योगदान और वर्तमान समय में उनकी प्रासंगिकता पर विस्तार से चर्चा की। वक्ताओं ने कहा कि जयप्रकाश नारायण की जयंती केवल एक स्वतंत्रता सेनानी को याद करने का अवसर नहीं है, बल्कि लोकतंत्र में जनभागीदारी, नागरिक अधिकारों और नैतिक मूल्यों के महत्व पर विचार करने का भी अवसर है। कार्यक्रम की शुरुआत लोकनायक जयप्रकाश नारायण की प्रतिमा पर माल्यार्पण एवं पुष्पांजलि अर्पित कर की गई। इसके बाद महाविद्यालय परिवार के सदस्यों ने जेपी के जीवन, विचारों और उनके आदर्शों पर अपने विचार व्यक्त किए। महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. शमशाद अहमद ने जयप्रकाश नारायण के जीवन-वृत्त पर प्रकाश डालते हुए उनके विचारों और योगदान को रेखांकित किया। उन्होंने भारत की विविधता को उसकी बड़ी ताकत बताते हुए सामाजिक समरसता और लोकतांत्रिक मूल्यों के महत्व पर चर्चा की। कार्यक्रम का संचालन कर रहीं डॉ. अंकिता त्रिपाठी ने साहित्य और राजनीति के अंतर्संबंधों पर विचार व्यक्त किए। डॉ. प्रियंका ने सर्वोदय एवं भूदान आंदोलन के संदर्भ में जेपी की वैचारिक और राजनीतिक प्रेरणाओं पर चर्चा की, जबकि डॉ. शकील हैदर ने उनके जीवन से जुड़े कुछ रोचक तथ्यों को विद्यार्थियों के साथ साझा किया। सहायक प्राध्यापक अम्बरीष कुमार ने कहा कि लोकतंत्र की वास्तविक भावना जनभागीदारी में निहित है। नागरिकों को अपने समुदाय के संचालन और नीतियों के निर्धारण में सक्रिय भूमिका निभाने का अवसर मिलना चाहिए। वहीं, सहायक प्राध्यापक अंगद कुमार ने कहा कि साध्य से अधिक महत्वपूर्ण साधन की पवित्रता है। जेपी ने इसी आदर्श को केंद्र में रखकर ‘संपूर्ण क्रांति’ का आह्वान किया था। डॉ. मणि रंजन राय ने कहा कि जयप्रकाश नारायण को केवल एक आदर्श राजनीतिक व्यक्तित्व के रूप में प्रस्तुत करने से अधिक महत्वपूर्ण उनके विचारों को मानवीय दृष्टिकोण से समझना और जीवन में नैतिक शुचिता को अपनाना है। सहायक प्राध्यापक निखिल रमन तांती ने जेपी की ऐतिहासिक भूमिका को याद करते हुए उन्हें युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत बताया। उन्होंने कहा कि उनके विचार आज भी युवाओं को सामाजिक बदलाव, नैतिकता और लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति जागरूक होने की प्रेरणा देते हैं। संगोष्ठी के दौरान सहायक प्राध्यापक डॉ. जूही प्रकाश की भी शुरुआत से अंत तक सक्रिय उपस्थिति रही। कार्यक्रम में महाविद्यालय के विद्यार्थियों ने भी उत्साहपूर्वक भाग लिया। संगोष्ठी ने विद्यार्थियों को लोकनायक जयप्रकाश नारायण के विचारों, लोकतंत्र में नागरिकों की भूमिका और सामाजिक परिवर्तन के महत्व को समझने का अवसर प्रदान किया।












