नियमोंनियमों की ‘धज्जियां’ उड़ाते साहब: गोपालगंज परिवहन पदाधिकारी की गाड़ी पर ही गैरकानूनी बंपर गार्ड, कौन काटेगा इनका चालान?
ब्यूरो रिपोर्ट: अखण्ड भारत न्यूज़
गोपालगंज ।। कहते हैं कि कानून की नजर में सब बराबर होते हैं, लेकिन गोपालगंज में यह कहावत केवल कागजों तक ही सीमित नजर आती है। जब रक्षक ही भक्षक बन जाए और नियम बनाने वाले ही उसे ठेंगे पर रखें, तो आम जनता से अनुशासन की उम्मीद करना बेइमानी है। ताजा मामला गोपालगंज के परिवहन पदाधिकारी (DTO) की सरकारी गाड़ी से जुड़ा है, जो खुद सड़क सुरक्षा नियमों की सरेआम धज्जियां उड़ाती नजर आ रही है। बता दे की सड़क सुरक्षा को लेकर पूरे देश में सख्त नियम लागू हैं। मोटर वाहन अधिनियम, 1988 के तहत गाड़ियों के आगे बंपर गार्ड (बुल बार) लगाना पूरी तरह गैरकानूनी है। इसके बावजूद, गोपालगंज के परिवहन पदाधिकारी की सरकारी गाड़ी के आगे चमचमाता हुआ बंपर गार्ड लगा है। विडंबना देखिए, जिस अधिकारी के कंधों पर जिले में यातायात नियमों का पालन कराने और उल्लंघन करने वालों का चालान काटने की जिम्मेदारी है, उनकी अपनी ही गाड़ी ‘अवैध’ साजो-सामान से लैस है।
जानिए क्यों खतरनाक है बंपर गार्ड?
विशेषज्ञों और सरकार ने बंपर गार्ड को प्रतिबंधित करने के पीछे ठोस वैज्ञानिक कारण दिए हैं जैसे की
क्रम्पल ज़ोन में बाधा:- यह गाड़ी के उस हिस्से को प्रभावित करता है जो टक्कर के प्रभाव को सोखने के लिए बनाया जाता है। कानून का ‘दोहरा’ चेहरा?
अगर एक आम आदमी अपनी गाड़ी पर ऐसा गार्ड लगा ले, तो पुलिस और परिवहन विभाग तत्काल 10,000 रुपये तक का भारी जुर्माना वसूल लेते हैं। लेकिन यहाँ तो “साहब” की गाड़ी है! अब बड़ा सवाल ये है की क्या सड़क सुरक्षा के नियम सिर्फ आम जनता की जेब ढीली करने के लिए हैं? क्या परिवहन पदाधिकारी महोदय कानून से ऊपर हैं? आखिर उस अधिकारी का चालान कौन काटेगा, जिसका काम ही दूसरों का चालान काटना है?
स्थानीय लोगों का कहना है कि यह सत्ता और पद का खुला दुरुपयोग है। जब परिवहन विभाग के मुखिया की गाड़ी ही अवैध होगी, तो वे किस मुंह से जनता को सुरक्षा का पाठ पढ़ाएंगे? अब देखना यह है कि क्या प्रशासन अपनी साख बचाने के लिए इस गाड़ी से बंपर हटवाता है और जुर्माना वसूलता है, या फिर “साहब” का रसूख कानून पर भारी बना रहेगा। अखण्ड भारत न्यूज़ की अपील:- नियमों का पालन सभी के लिए अनिवार्य होना चाहिए, चाहे वह आम नागरिक हो या कोई बड़ा पदाधिकारी। प्रशासन को इस दोहरे मापदंड को खत्म करना चाहिए। की ‘धज्जियां’ उड़ाते साहब: गोपालगंज परिवहन पदाधिकारी की गाड़ी पर ही गैरकानूनी बंपर गार्ड, कौन काटेगा इनका चालान?
एयरबैग्स का फेल होना:- बंपर गार्ड लगाने से कार के सेंसर दब जाते हैं। दुर्घटना की स्थिति में एयरबैग समय पर नहीं खुलते, जिससे गाड़ी के अंदर बैठे लोगों की जान जा सकती है।
पैदल यात्रियों के लिए घातक:- कार का अगला हिस्सा इस तरह डिजाइन किया जाता है कि टक्कर होने पर पैदल यात्री को कम चोट आए, लेकिन लोहे का बंपर गार्ड किसी के लिए भी जानलेवा साबित हो सकता है।
ब्यूरो रिपोर्ट: अखण्ड भारत न्यूज़
गोपालगंज ।। कहते हैं कि कानून की नजर में सब बराबर होते हैं, लेकिन गोपालगंज में यह कहावत केवल कागजों तक ही सीमित नजर आती है। जब रक्षक ही भक्षक बन जाए और नियम बनाने वाले ही उसे ठेंगे पर रखें, तो आम जनता से अनुशासन की उम्मीद करना बेइमानी है। ताजा मामला गोपालगंज के परिवहन पदाधिकारी (DTO) की सरकारी गाड़ी से जुड़ा है, जो खुद सड़क सुरक्षा नियमों की सरेआम धज्जियां उड़ाती नजर आ रही है। बता दे की सड़क सुरक्षा को लेकर पूरे देश में सख्त नियम लागू हैं। मोटर वाहन अधिनियम, 1988 के तहत गाड़ियों के आगे बंपर गार्ड (बुल बार) लगाना पूरी तरह गैरकानूनी है। इसके बावजूद, गोपालगंज के परिवहन पदाधिकारी की सरकारी गाड़ी के आगे चमचमाता हुआ बंपर गार्ड लगा है। विडंबना देखिए, जिस अधिकारी के कंधों पर जिले में यातायात नियमों का पालन कराने और उल्लंघन करने वालों का चालान काटने की जिम्मेदारी है, उनकी अपनी ही गाड़ी ‘अवैध’ साजो-सामान से लैस है।
जानिए क्यों खतरनाक है बंपर गार्ड?
विशेषज्ञों और सरकार ने बंपर गार्ड को प्रतिबंधित करने के पीछे ठोस वैज्ञानिक कारण दिए हैं जैसे की
- एयरबैग्स का फेल होना:- बंपर गार्ड लगाने से कार के सेंसर दब जाते हैं। दुर्घटना की स्थिति में एयरबैग समय पर नहीं खुलते, जिससे गाड़ी के अंदर बैठे लोगों की जान जा सकती है।
- पैदल यात्रियों के लिए घातक:- कार का अगला हिस्सा इस तरह डिजाइन किया जाता है कि टक्कर होने पर पैदल यात्री को कम चोट आए, लेकिन लोहे का बंपर गार्ड किसी के लिए भी जानलेवा साबित हो सकता है।
- क्रम्पल ज़ोन में बाधा:- यह गाड़ी के उस हिस्से को प्रभावित करता है जो टक्कर के प्रभाव को सोखने के लिए बनाया जाता है। कानून का ‘दोहरा’ चेहरा?
अगर एक आम आदमी अपनी गाड़ी पर ऐसा गार्ड लगा ले, तो पुलिस और परिवहन विभाग तत्काल 10,000 रुपये तक का भारी जुर्माना वसूल लेते हैं। लेकिन यहाँ तो “साहब” की गाड़ी है! अब बड़ा सवाल ये है की क्या सड़क सुरक्षा के नियम सिर्फ आम जनता की जेब ढीली करने के लिए हैं? क्या परिवहन पदाधिकारी महोदय कानून से ऊपर हैं? आखिर उस अधिकारी का चालान कौन काटेगा, जिसका काम ही दूसरों का चालान काटना है?
स्थानीय लोगों का कहना है कि यह सत्ता और पद का खुला दुरुपयोग है। जब परिवहन विभाग के मुखिया की गाड़ी ही अवैध होगी, तो वे किस मुंह से जनता को सुरक्षा का पाठ पढ़ाएंगे? अब देखना यह है कि क्या प्रशासन अपनी साख बचाने के लिए इस गाड़ी से बंपर हटवाता है और जुर्माना वसूलता है, या फिर “साहब” का रसूख कानून पर भारी बना रहेगा। अखण्ड भारत न्यूज़ की अपील:- नियमों का पालन सभी के लिए अनिवार्य होना चाहिए, चाहे वह आम नागरिक हो या कोई बड़ा पदाधिकारी। प्रशासन को इस दोहरे मापदंड को खत्म करना चाहिए।










