पूर्व मंत्री शाहिद अली खान की आठवीं पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि सभा, जनसेवा और ईमानदारी को किया गया याद
डॉ.राहुल कुमार द्विवेदी, बिहार संपादक, अखंड भारत न्यूज़।
बिहार सरकार के पूर्व मंत्री, कद्दावर समाजसेवी एवं हरदिल अज़ीज़ नेता मरहूम शाहिद अली खान की आठवीं पुण्यतिथि (यौमे वफात) के अवसर पर जिले में भावपूर्ण श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया। इस मौके पर उनके व्यक्तित्व, कृतित्व और जनसेवा को याद करते हुए खिराजे अकीदत पेश की गई तथा उनकी मग़फिरत के लिए विशेष दुआएँ की गईं। श्रद्धांजलि कार्यक्रम में मरहूम शाहिद अली खान की पुत्री डॉ. इकरा अली खान तथा मदरसा रहमानिया मेहसौल के पूर्व अध्यक्ष मो. अरमान अली ने उन्हें याद करते हुए उनके संघर्षपूर्ण और प्रेरणादायी जीवन पर प्रकाश डाला। डॉ. इकरा अली खान ने अपने भावुक संदेश में कहा कि उनके पिता ने राजनीति को सत्ता का साधन नहीं, बल्कि जनसेवा का माध्यम बनाया। सादगी, ईमानदारी और निस्वार्थ सेवा उनके जीवन का मूल मंत्र था। वे समाज के हर तबके—खासकर गरीबों, कमजोरों और वंचितों—की आवाज़ बनकर उनके हक़ और इंसाफ़ के लिए आजीवन संघर्ष करते रहे। उनके विचार और आदर्श आज भी नई पीढ़ी के लिए प्रेरणास्रोत हैं।
मदरसा रहमानिया मेहसौल के पूर्व अध्यक्ष मो. अरमान अली ने कहा कि मरहूम शाहिद अली खान न सिर्फ़ एक सशक्त और दूरदर्शी राजनेता थे, बल्कि एक नेकदिल, मिलनसार और संवेदनशील इंसान भी थे। शिक्षा के प्रसार, सामाजिक सौहार्द और आपसी भाईचारे को मज़बूत करने में उनका योगदान अविस्मरणीय है। उन्होंने हमेशा समाज में अमन, भाईचारा और बराबरी का पैग़ाम दिया।
इस अवसर पर मरहूम की रूह की शांति के लिए सामूहिक दुआ की गई। दुआ के दौरान कहा गया “अल्लाह तआला मरहूम शाहिद अली खान साहब की मग़फिरत फरमाए, उनकी क़ब्र को जन्नत के बाग़ों में से एक बाग़ बनाए और उन्हें करवट-करवट जन्नत नसीब फरमाए। आमीन।”
श्रद्धांजलि सभा में जदयू नेता मो. जफरुल्लाह खान, मो. बशारत करीम गुलाब, मो. इश्तियाक आलम तस्लीमी, मो. कमर अख्तर, पूर्व मेयर प्रत्याशी तौकीर अनवर उर्फ सिकंदर, परिहार के पूर्व जिला पार्षद प्रो. गौहर सिद्दीकी सहित बड़ी संख्या में सामाजिक, राजनीतिक और गणमान्य लोग उपस्थित रहे। सभी वक्ताओं ने अपने विचार रखते हुए कहा कि मरहूम शाहिद अली खान साहब की सेवाओं, संघर्षों और सिद्धांतों को हमेशा याद रखा जाएगा। उनके बताए रास्ते—ईमानदारी, जनसेवा और सामाजिक समरसता—पर चलना ही उन्हें सच्ची श्रद्धांजलि होगी।
कार्यक्रम के अंत में उपस्थित लोगों ने संकल्प लिया कि वे मरहूम शाहिद अली खान के आदर्शों को अपने जीवन में अपनाते हुए समाज के कमजोर और जरूरतमंद वर्ग के लिए कार्य करते रहेंगे, ताकि उनका सपना—एक न्यायपूर्ण और समतामूलक समाज—साकार हो सके।












