डीएवी पीजी कॉलेज में प्राचार्य के खिलाफ शिक्षकों का आंदोलन तेज, महिला शिक्षकों के उत्पीड़न और स्पेशल लीव के मुद्दे पर बड़ा फैसला
सीवान फिरोज अंसारी की रिपोर्ट
डीएवी पीजी कॉलेज में प्राचार्य डॉ. रामानंद राम पर भ्रष्टाचार, मनमानी, महिला शिक्षकों का उत्पीड़न और उन्हें विशेष अवकाश (स्पेशल लीव) से वंचित रखने के गंभीर आरोपों के बीच शिक्षकों का आंदोलन लगातार तेज होता जा रहा है। शिक्षक संघ ने छात्रों की पढ़ाई बाधित न होने देने के लिए रणनीति बनाई है और आंदोलन को और सशक्त बनाने का फैसला लिया है। शिक्षकों के विरोध के कारण मामला अब तूल पकड़ चुका है। विशेष रूप से महिला शिक्षिकाओं को महीने में लगातार दो दिनों के स्पेशल अवकाश से वंचित रखने का मुद्दा प्रमुखता से उठाया गया। इस संबंध में बिहार उच्च शिक्षा विभाग के 1992 के संकल्प के आधार पर विश्वविद्यालयों एवं संबद्ध कॉलेजों में महिला शिक्षकों को यह सुविधा उपलब्ध कराने का प्रावधान है। मंगलवार को जयप्रकाश विश्वविद्यालय (जीपीयू) के कुलसचिव द्वारा इस संबंध में अधिसूचना जारी कर दी गई, जिसमें स्पष्ट रूप से कार्यालय आदेश के माध्यम से इस नियम को लागू करने की बात कही गई है। सोमवार को विश्वविद्यालय की आंतरिक शिकायत समिति के समक्ष डॉ. रामानुज कौशिक और डॉ. प्रभाकर निषाद ने अपना लिखित बयान दर्ज कराया। इनमें प्राचार्य की ओर से कथित धमकियां, दुर्व्यवहार और अन्य अनियमितताओं का जिक्र किया गया।
डीएवी पीजी कॉलेज शिक्षक संघ के अध्यक्ष डॉ. धनंजय यादव ने बताया कि शिक्षकों ने लोकतांत्रिक और शांतिपूर्ण तरीके से अपना विरोध दर्ज कराने का निर्णय लिया है। विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित न हो, इसको ध्यान में रखते हुए अब शिक्षक काली पट्टी बांधकर सुबह 10 बजे से 10.25 बजे तक शांतिपूर्ण प्रदर्शन करेंगे और उसके बाद 10.30 बजे से नियमित कक्षाएं संचालित करेंगे।शिक्षक संघ का कहना है कि प्राचार्य की तानाशाहीपूर्ण कार्यशैली, भ्रष्टाचार के आरोप और महिला शिक्षकों के साथ भेदभावपूर्ण व्यवहार बर्दाश्त से बाहर हो चुका है। आंदोलन को अब और व्यापक बनाने की तैयारी है, जिसमें धरना-प्रदर्शन जैसे कदम भी शामिल हो सकते हैं। जयप्रकाश विश्वविद्यालय के कुलपति ने मामले की जांच के आदेश दिए हैं और जांच तेजी से चल रही है। यह मामला न केवल कॉलेज प्रशासन बल्कि उच्च शिक्षा विभाग के लिए भी चुनौती बन चुका है, क्योंकि 1992 के संकल्प को लागू न करने के आरोप गंभीर हैं। शिक्षकों ने न्याय और पारदर्शिता की मांग की है, ताकि कॉलेज का शैक्षणिक माहौल सुचारू रूप से चले।










