बिशुनपुरा में श्रीमद् भागवत कथा ज्ञान यज्ञ का शुभारंभ, कलश यात्रा के साथ शुरू हुआ आध्यात्मिक महायज्ञ
नौतन से फिरोज अंसारी की रिपोर्ट


स्थानीय प्रखंड अंतर्गत बिशुनपुरा गांव में एक पवित्र और आध्यात्मिक आयोजन की शुरुआत हुई है। शुक्रवार, 20 मार्च 2026 को यहां सेवानिवृत्त प्रधानाचार्य श्री नरेंद्र मिश्र के निवास पर श्रीमद् भागवत कथा ज्ञान यज्ञ का भव्य शुभारंभ किया गया। इस धार्मिक अनुष्ठान की शुरुआत प्रातः 10 बजे भव्य कलश यात्रा के साथ हुई, जिसके बाद मंडप प्रवेश और वेदी पूजन के विधिवत संस्कार संपन्न हुए। यह ज्ञान यज्ञ आगामी आठ दिनों तक चलेगा, जिसमें प्रतिदिन संध्या 7 बजे से श्रीमद् भागवत महापुराण की कथा का श्रवण होगा। कथावाचन का दायित्व संभाल रहे हैं प्रसिद्ध कथावाचक आचार्य पंडित मृगेंद्र शांडिल्य, जिनके मुखारविंद से निकलने वाली अमृतमयी वाणी सुनकर श्रद्धालु गहन आध्यात्मिक आनंद प्राप्त कर रहे हैं। उनकी सरल, ओजस्वी और भावपूर्ण कथा-शैली ने गांववासियों और आसपास के क्षेत्रों से आए श्रोताओं के मन को मोह लिया है। कलश यात्रा में महिलाएं, पुरुष और बच्चे शामिल हुए। सभी ने हाथों में कलश, फूल मालाएं आदि लिए हुए भक्ति-भाव से जयघोष करते हुए यात्रा में भाग लिया। यात्रा गांव के मुख्य मार्गों से गुजरते हुए मंडप स्थल पर पहुंची, जहां पूजन-अर्चना के बाद यज्ञ की औपचारिक शुरुआत हुई। इस दौरान वेद-मंत्रों का उच्चारण, हवन और दीप-प्रज्ज्वलन ने पूरे वातावरण को दिव्य बना दिया।
श्री नरेंद्र मिश्र, जो स्वयं एक सम्मानित शिक्षाविद् रह चुके हैं, ने अपने परिवार के साथ मिलकर इस यज्ञ का आयोजन किया है। उनका उद्देश्य है कि गांव में धार्मिक-आध्यात्मिक चेतना का प्रसार हो और लोग भागवत के ज्ञान से जीवन को सार्थक बनाएं। पंडित मृगेंद्र शांडिल्य जी ने बताया कि श्रीमद् भागवत कथा न केवल पापों का नाश करती है, बल्कि मनुष्य को सत्य, प्रेम और भक्ति के मार्ग पर अग्रसर भी करती है। वहीं श्रोताओं का कहना है कि पंडित मृगेंद्र शांडिल्य जी की कथा सुनकर उनका मन शांत हो रहा है और जीवन के प्रति एक नई दृष्टि प्राप्त हो रही है। यह आयोजन न केवल बिशुनपुरा बल्कि आसपास के गांवों के लिए भी एक बड़ा धार्मिक उत्सव बन गया है। लोग कथा श्रवण के लिए पहुंच रहे हैं। आठ दिवसीय इस ज्ञान यज्ञ का समापन 27 मार्च 2026 को होगा, जिसमें हवन के बाद भव्य भंडारा का आयोजित किया जाएगा। ऐसे आयोजन समाज में सद्भाव, भक्ति और नैतिक मूल्यों को मजबूत करते हैं। बिशुनपुरा के इस यज्ञ से पूरे क्षेत्र में सकारात्मक ऊर्जा का संचार हो रहा है।










