शब-ए-बारात इबादत, रहमत व मगफिरत की रात : हाफ़िज़ अख़्तर अंसारी
नौतन से फिरोज अंसारी की रिपोर्ट


शब-ए-बारात, जिसे माफी की रात या लैलतुल-बरात भी कहा जाता है, इस्लाम में बहुत ही मुकद्दस और रहमत भरी रात मानी जाती है। यह इस्लामी हिजरी कैलेंडर के शाबान महीने की 15वीं तारीख की रात को मनाई जाती है। इस रात को अल्लाह तआला अपने बंदों के नाम-ए-आमाल में बदलाव करते हैं और उनकी मगफिरत फरमाते हैं। उक्त बातें हाफ़िज़ अख्तर अंसारी ने कही। बता दें कि इस बार 3 फरवरी 2026 की शाम से शुरू होकर 4 फरवरी 2026 की सुबह तक शब-ए-बरात मनाई गई। यह तारीख चांद दिखने पर निर्भर करती है। इस रात के बाद लगभग 15 दिन में रमजानुल मुबारक का पाक महीना शुरू हो जाता है, इसलिए इसे रमजान की तैयारी का आखिरी मौका भी माना जाता है। इस मुबारक रात में मुसलमान नमाज-ए-तहज्जुद, कुरान-ए-पाक की तिलावत, इस्तिगफार, दरूद शरीफ और दुआएं पढ़ते हैं। इसके अलावा लोग कब्रिस्तान जाकर पूर्वजों के लिए दुआ करते हैं।
मान्यता है कि इस रात अल्लाह की रहमत बरसती है और छोटे-बड़े गुनाह माफ हो जाते हैं, बशर्ते इंसान सच्चे दिल से तौबा करे। पैगंबर मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने भी इस रात की फजीलत बताई है कि अल्लाह तआला अपनी मखलूक पर विशेष नजर फरमाते हैं। मुस्लिम समुदाय इस रात को खुदा की इबादत और नेकी के अमल में गुजारता है।












