जिला पदाधिकारी द्वारा प्रेस वार्ता आयोजित, एग्री-स्टैक परियोजना एवं फार्मर रजिस्ट्री की दी गई विस्तृत जानकारी
आज दिनांक 31 जनवरी 2026 को समाहरणालय सभा कक्ष में जिला पदाधिकारी श्री पवन कुमार सिन्हा द्वारा एक प्रेस वार्ता का आयोजन किया गया। प्रेस वार्ता का मुख्य उद्देश्य एग्री-स्टैक परियोजना के अंतर्गत फार्मर रजिस्ट्री से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारियाँ मीडिया के माध्यम से आम किसानों तक पहुँचाना रहा।
इस अवसर पर अपर समाहर्ता श्री राजेश्वरी पाण्डेय, जिला भू-अर्जन पदाधिकारी सह जिला सूचना एवं जनसंपर्क पदाधिकारी श्री अनिल कुमार, विशेष कार्य पदाधिकारी श्री संदीप कुमार, जिला जनसंपर्क कार्यालय के कर्मचारी एवं विभिन्न मीडिया संस्थानों के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।
प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए जिला पदाधिकारी श्री पवन कुमार सिन्हा ने बताया कि फार्मर रजिस्ट्री, एग्री-स्टैक परियोजना का एक अत्यंत महत्वपूर्ण घटक है, जिसका उद्देश्य राज्य में कृषि सेवाओं को अधिक आधुनिक, पारदर्शी, सरल एवं प्रभावी बनाना है। इस परियोजना के अंतर्गत प्रत्येक किसान का एक विशिष्ट Farmer ID तैयार किया जा रहा है, जिसमें किसान की भूमि से संबंधित विवरण एवं आधार संख्या को एकीकृत कर डिजिटल रूप से जोड़ा जा रहा है।
उन्होंने बताया कि इसके अंतर्गत बिहार भूमि डाटाबेस को समेकित करते हुए प्रत्येक राजस्व ग्राम के समान नाम एवं समान पिता नाम वाले किसानों की जमाबंदी का एक ऑनलाइन बकेट तैयार किया गया है। इसी बकेट के आधार पर राज्य स्तर से फार्मर रजिस्ट्री का निर्माण किया जा रहा है, जिससे किसानों की पहचान में किसी प्रकार की त्रुटि न हो।
जिला पदाधिकारी ने बताया कि प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना (पीएम-किसान) के लाभुकों को आगामी किस्त का लाभ प्राप्त करने के लिए अनिवार्य रूप से फार्मर रजिस्ट्री कैम्प में भाग लेकर अपना Farmer ID बनवाना होगा। इसके लिए किसानों को फार्मर रजिस्ट्री वेब पोर्टल अथवा मोबाइल ऐप के माध्यम से बायोमेट्रिक अथवा फेस ऑथेंटिकेशन द्वारा e-KYC सत्यापन कराना होगा तथा भूमि से संबंधित दावा दर्ज करना अनिवार्य होगा।
प्रेस वार्ता में जिला पदाधिकारी ने फार्मर रजिस्ट्री के प्रमुख लाभों पर भी विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि भविष्य में विभिन्न सरकारी कृषि योजनाओं का लाभ फार्मर रजिस्ट्री के आधार पर ही देय होगा। न्यूनतम समर्थन मूल्य पर कृषि उत्पादों की बिक्री को सरल बनाया जाएगा। फसल नुकसान की स्थिति में किसानों को वास्तविक क्षति के अनुरूप मुआवजा प्राप्त करने में सुविधा होगी।
उन्होंने यह भी बताया कि भविष्य में उर्वरक, बीज एवं कीटनाशी का वितरण फार्मर रजिस्ट्री आईडी में दर्ज रकबा के आधार पर किया जाएगा। इसके साथ ही कृषि यांत्रिकरण योजनाओं के अंतर्गत 91 प्रकार के कृषि यंत्रों पर अनुदान का लाभ भी फार्मर रजिस्ट्री आईडी में दर्ज भूमि के आधार पर ही दिया जाएगा। फसल क्षति एवं फसल बीमा का लाभ भी इसी के आधार पर देय होगा।
जिला पदाधिकारी ने कहा कि फार्मर रजिस्ट्री आईडी ही भविष्य में प्रत्येक किसान की डिजिटल पहचान होगी। पीएम-किसान सम्मान निधि योजना का निर्बाध लाभ प्राप्त करने तथा भविष्य में संचालित होने वाली सभी योजनाओं का लाभ लेने के लिए फार्मर रजिस्ट्री अत्यंत आवश्यक है।
उन्होंने सभी किसान भाइयों एवं बहनों से अपील की कि वे शीघ्र अपने किसान सलाहकार, किसान समन्वयक अथवा हल्का कर्मचारी से संपर्क कर फार्मर रजिस्ट्री बनवाएं। फार्मर रजिस्ट्री के लिए आवश्यक दस्तावेजों में आधार कार्ड, भूमि से संबंधित दस्तावेज एवं मोबाइल नंबर शामिल हैं।












