श्री कृष्णा पब्लिक स्कूल में बिहार दिवस पर निकली प्रभात फेरी
नौतन से फिरोज अंसारी की रिपोर्ट

स्थानीय प्रखंड क्षेत्र में बिहार दिवस धूमधाम से मनाया गया। कई विद्यालयों में सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। वहीं सिसवां स्थित श्री कृष्णा पब्लिक स्कूल के छात्र-छात्राओं ने प्रभातफेरी निकाली। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए प्रधानाध्यापक राकेश कुमार मिश्र ने कहा कि यह दिन बिहार राज्य के गठन की याद दिलाता है, जब 22 मार्च 1912 को बंगाल प्रेसीडेंसी से अलग होकर बिहार अलग प्रांत के रूप में अस्तित्व में आया था। राज्य भर में इस दिन विभिन्न सांस्कृतिक, शैक्षिक और सामाजिक गतिविधियां आयोजित की जाती हैं, जिनमें स्कूलों द्वारा निकाली जाने वाली प्रभात फेरियां विशेष महत्व रखती हैं। ये फेरियां न केवल बिहार की गौरवशाली विरासत को याद करती हैं, बल्कि युवा पीढ़ी में राज्य के प्रति गर्व और जागरूकता भी जगाती हैं। स्कूल परिसर से शुरू हुई यह प्रभात फेरी सिसवां मोड़ से होकर जगदीशपुर, महुवईं, बसदेवा, ताली और बिशुनपुरा जैसे आसपास के गांवों से गुजरी। बच्चे हाथों में तिरंगे, बिहार के प्रतीक चिन्ह वाले बैनर और नारे लगाते हुए उत्साह से आगे बढ़े। “जय बिहार”, “बिहार हमारा गौरव है”, “विकसित बिहार, उज्ज्वल बिहार” जैसे नारे गूंजते रहे, जिससे पूरे क्षेत्र में बिहार दिवस का संदेश फैल गया।
प्रभात फेरी में छोटे-छोटे बच्चे से लेकर बड़े छात्र-छात्राएं शामिल थे। वे स्कूल की वर्दी में सजे हुए थे और कई बच्चों ने बिहार की पारंपरिक पोशाकें भी पहनी थीं। शिक्षकों और अभिभावकों का मार्गदर्शन में यह आयोजन सुव्यवस्थित ढंग से संपन्न हुआ। गांवों में स्थानीय लोग भी बच्चों का स्वागत करते नजर आए। कई जगहों पर लोगों ने उन्हें पानी, फल और मिठाई देकर प्रोत्साहित किया। यह दृश्य ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा और सांस्कृतिक जागरूकता के प्रति बढ़ते उत्साह को दर्शाता है।
प्रभात फेरी के अंत में सभी प्रतिभागी पुनः विद्यालय परिसर में पहुंचे, जहां स्कूल प्रबंधन ने एक छोटा सा समारोह आयोजित किया। प्रधानाचार्य ने बच्चों को संबोधित करते हुए कहा कि बिहार दिवस केवल एक तारीख नहीं, बल्कि हमारी पहचान, इतिहास और भविष्य का प्रतीक है। उन्होंने बच्चों से अपील की कि वे पढ़ाई के साथ-साथ बिहार की संस्कृति, भाषा और परंपराओं को संजोए रखें तथा राज्य के विकास में योगदान दें।
यह कार्यक्रम न केवल स्कूल के छात्रों के लिए यादगार रहा, बल्कि पूरे सिसवां क्षेत्र के लिए प्रेरणास्रोत बना। ऐसे आयोजन युवाओं में राज्यप्रेम और सामाजिक जिम्मेदारी की भावना विकसित करते हैं। श्री कृष्णा पब्लिक स्कूल का यह प्रयास सराहनीय है, जो दिखाता है कि ग्रामीण इलाकों में भी शिक्षा के माध्यम से सांस्कृतिक मूल्यों को मजबूत किया जा सकता है।










