गोपालगंज में प्रवासी मजदूरों की घर वापसी तेज, डीएम ने दिए सर्वे के निर्देश।
गोपालगंज ब्यूरो आशिष रंजन श्रीवास्तव की रिपोर्ट
गोपालगंज।। खाड़ी देशों में बढ़ते युद्ध के हालातों और बढ़ते तनाव के बीच बिहार के प्रवासी मजदूरों का स्वदेश लौटने का सिलसिला तेज हो गया है। इसे देखते हुए बिहार सरकार पूरी तरह अलर्ट मोड में है। शासन के निर्देश पर गोपालगंज जिला प्रशासन ने भी अपनी कमर कस ली है ताकि वापस लौट रहे कामगारों को जिले में ही रोजगार और सरकारी योजनाओं का लाभ दिया जा सके। जिलाधिकारी पवन कुमार सिन्हा ने सोमवार को संबंधित अधिकारियों के साथ एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक की। बैठक में उन्होंने स्पष्ट किया कि खाड़ी देशों से लौटने वाले हर श्रमिक का सटीक डेटा होना अनिवार्य है। डीएम ने कहा कि सरकार की प्राथमिकता इन मजदूरों का कौशल पहचानकर उन्हें स्थानीय स्तर पर आत्मनिर्भर बनाना है। प्रवासी मजदूरों की पहचान के लिए जिले में कल से व्यापक डोर-टू-डोर सर्वे शुरू किया जाएगा। इस अभियान की कमान जमीनी स्तर पर तैनात कर्मियों को सौंपी गई है पंचायत स्तर पर दफादार और चौकीदार को घर-घर जाकर जानकारी जुटाने का जिम्मा मिला है। सर्वे में मजदूर का नाम, विदेश में उनका कार्य (Skill), लौटने की तारीख और उनकी शैक्षणिक योग्यता जैसी जानकारियां दर्ज की जाएंगी। अंचल और प्रखंड स्तर के अधिकारी इस पूरे सर्वे की नियमित निगरानी करेंगे। सरकार का मुख्य उद्देश्य इन श्रमिकों को वापस संकट में जाने से रोकना है। जुटाए गए डेटा के आधार पर प्रशासन निम्नलिखित कदम उठाएगा जो मजदूर जिस काम में कुशल हैं, उन्हें उसी क्षेत्र में ऋण या सब्सिडी उपलब्ध कराना। राशन कार्ड, आयुष्मान कार्ड और अन्य कल्याणकारी योजनाओं से तुरंत जोड़ना। लघु उद्योगों और सरकारी प्रोजेक्ट्स में इन कामगारों को प्राथमिकता देना।
जिलाधिकारी का संदेश:
“हमारा लक्ष्य है कि संकट की घड़ी में घर लौटे किसी भी श्रमिक को आर्थिक तंगी का सामना न करना पड़े। जिला प्रशासन उनके डेटाबेस के आधार पर रोजगार सृजन के लिए हर संभव कदम उठाएगा।”
खाड़ी देशों में अनिश्चितता के माहौल के बीच, जिला प्रशासन की यह सक्रियता प्रवासी परिवारों के लिए बड़ी राहत बनकर आई है। अब देखना यह है कि धरातल पर यह सर्वे कितनी तेजी से पूरा होता है।










