नरैनी के 3.36 लाख लोगों को खिलाएंगे फाइलेरिया की दवा
10 से 28 फरवरी तक चलेगा आईडीए अभियान
कालिंजर उत्सव में भी 15 से 17 फरवरी तक कैम्प लगाकर सभी आगुंतकों को खिलाई जाएंगी दवा
बांदा, 6 फरवरी 2026।
प्रदेश फाइलेरिया उन्मूलन की ओर अग्रसर है। जिले के नरैनी ब्लाक को भी इस बीमारी से मुक्त कराना है। इसलिए ब्लाक के सभी पात्र तीन लाख 36 हजार लोगों को 10 से 28 फरवरी के बीच चलने जा रहे सर्वजन दवा सेवन (आईडीए) अभियान के दौरान फाइलेरियारोधी दवाएं खिलानी है। यही फाइलेरिया जैसी गंभीर व दीर्घकालिक बीमारी से बचाव का एकमात्र उपाय है। अभियान के तहत फाइलेरियारोधी दवाएं—आईवरमेक्टिन, डीईसी और एल्बेंडाजोल, स्वास्थ्यकर्मियों के सामने खिलाई जाएंगी।
मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ विजेंद्र सिंह ने शुक्रवार को आयोजित मीडिया संवेदीकरण कार्यशाला में यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि प्रदेश के 51 जिलों के 782 ब्लाक में फैली यह बीमारी अब सिमट रही है। इस बार के आईडीए अभियान में 21 जिलों के 64 ब्लाक में ही यह अभियान चलाया जा रहा है। इसमें जिले का नरैनी ब्लाक भी है। हमें अपने जिले से इस बीमारी को भगाना है। इसका एक ही तरीका है कि एक साल से कम उम्र के बच्चों, गर्भवती महिलाओं व अत्यंत गंभीर मरीजों के अलावा सभी लोग स्वधर्म समझकर फाइलेरिया रोधी दवाओं का सेवन करें। उन्होंने बताया कि कालिंजर उत्सव में भी 15 से 17 फरवरी तक कैम्प लगाकर मेले में आने वाले सभी लोगों को दवा खिलाई जाएगी। इसके अलावा 17 फरवरी को फाइलेरिया मरीजों को एमएमडीपी किट वितरित की जाएगी।
जिला मलेरिया अधिकारी पूजा अहिरवार ने बताया कि फाइलेरिया, (हाथीपांव) मादा क्यूलेक्स मच्छर के काटने से होने वाला संक्रामक तथा दिव्यांगता उत्पन्न करने वाला रोग है। पहले यह जिले के 10 ब्लाक में फैला था लेकिन दवा सेवन का उच्च कवरेज प्राप्त होने के कारण नौ ब्लाक में प्रसार काफी कम हो गया है, इसलिए इस बार सिर्फ नरैनी ब्लॉक में आईडीए अभियान संचालित किया जा रहा है।
बघेलाबारी आयुष्मान आरोग्य मंदिर की सीएचओ रोशनी ने बताया कि उनका समूह लगातार आसपास के गांव में लोगों में जागरूकता फैलाता है। वे न सिर्फ फाइलेरिया बल्कि ट्यूबरक्लोसिस समेत अन्य रोगों के प्रति भी लोगों को जागरूक करते हैं।
रानी दुर्गावती मेडिकल कालेज के कम्युनिटी मेडिसिन विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. लाल दिवाकर सिंह ने बताया कि फाइलेरिया उन्मूलन के लिए कम से कम 90 प्रतिशत पात्र आबादी का दवा सेवन आवश्यक है, क्योंकि अधिकतर संक्रमित व्यक्ति लक्षणहीन वाहक होते हैं और अनजाने में संक्रमण फैलाते रहते हैं।
कार्यशाला में एसीएमओ वीबीडी डॉ. आरएन प्रसाद भी मौजूद रहे।
इनसेट
किसी और को न हो ऐ रोग
बदौसा गांव से आए फाइलेरिया मरीज दिलीप कुमार ने बताया कि उन्हें 25 साल पहले हाथीपांव हो गया था। बहुत इलाज कराया लेकिन ठीक नहीं हुआ। अब तो बस एक ही लक्ष्य है कि किसी और को यह रोग न हो। इसके लिए भरसक जागरूकता करते रहते हैं।
फैक्ट फाइल
793 जनपद में फाइलेरिया के कुल मरीज
612 ड्रग एडमिनिस्ट्रेटर तैनात
306 दवा सेवन कराने वाली कुल टीमें
50 सुपरवाइजर अभियान की निगरानी करेंगे












