सत्य को स्वीकार करने का साहस रखे समाज : पूज्या शीघ्रता त्रिपाठी
श्रीमद्भागवत कथा के दूसरे दिन उमड़ा जनसैलाब
मैरवा से फिरोज अंसारी की रिपोर्ट
प्रखंड के कबीरपुर स्थित पश्चिम टोला में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के दूसरे दिन श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। पूज्या शीघ्रता त्रिपाठी जी के सानिध्य में चल रही इस ज्ञान यज्ञ में आज समाज की विडंबनाओं और वास्तविक धर्म के स्वरूप पर विस्तार से चर्चा की गई। प्रकाश डालते हुए पूज्या त्रिपाठी जी ने कहा कि यह दुनिया बड़ी अजीब है, जो सच को देखकर भी स्वीकार नहीं करती। लेकिन झूठ को सुनकर तुरंत सहमत हो जाती है। उन्होंने समाज की मानसिकता पर कटाक्ष करते हुए कहा जब कोई अच्छा काम करता है तो दुनिया को विश्वास नहीं होता। लेकिन किसी पर आरोप लगते ही सब मान लेते हैं कि उसने ऐसा ही किया होगा। दुनिया की समस्या सिर्फ यह नहीं है कि वह अच्छा नहीं करती, बल्कि यह भी है कि वह अच्छाई को स्वीकार करने का साहस नहीं रखती है। उन्होंने भक्तों से आह्वान किया कि यदि जीवन में कुछ नेक और बड़ा करना है, तो दुनिया की परवाह छोड़कर केवल अपने सत्कर्मों पर ध्यान केंद्रित करें। कथा के दौरान जीवन की विचित्रताओं पर चर्चा करते हुए व्यासपीठ से संदेश दिया गया कि हम तीर्थ स्नान के लिए कोसों दूर जाते हैं। लेकिन पड़ोस में प्यासे मरते इंसान को जल नहीं देते। उन्होंने कहा कि बड़े भंडारे लगाने से बेहतर है कि हम अपने मोहल्ले के उन किशोर-किशोरियों की मदद करें जो गरीबी के कारण मजदूरी करने को विवश हैं। त्रिपाठी जी ने कहा कि समाज को आज फिर से संत एकनाथ और नामदेव जैसे महापुरुषों की दृष्टि की आवश्यकता है, जो पशु में पशुपति और कुत्ते में भी देवत्व का दर्शन कर सकें।










