जानकी जन्मभूमि सीतामढ़ी में विश्व हिंदू परिषद उत्तर बिहार प्रांत कार्य समिति की तीन दिवसीय बैठक का भव्य शुभारंभ
डॉ.राहुल कुमार द्विवेदी, बिहार संपादक, अखंड भारत न्यूज़







जानकी जन्मभूमि सीतामढ़ी की पावन धरती पर विश्व हिंदू परिषद उत्तर बिहार प्रांत की प्रांत कार्य समिति की तीन दिवसीय महत्वपूर्ण बैठक का आयोजन सिद्धिविनायक होटल के सभागार में भव्य रूप से किया गया। दिनांक 3 से 5 जनवरी तक आयोजित इस बैठक का शुभारंभ दीप प्रज्वलन एवं मंगलाचरण के साथ हुआ, जिसमें संगठन के केंद्रीय, क्षेत्रीय एवं प्रांतीय स्तर के वरिष्ठ पदाधिकारी, संत-महात्मा एवं 31 जिलों से आए लगभग ढाई सौ कार्यकर्ताओं ने सहभागिता की। कार्यक्रम के शुभारंभ अवसर पर विश्व हिंदू परिषद के केंद्रीय मंत्री श्री अम्बरीष, क्षेत्र अधिकारी डॉ. वीरेंद्र साहू, प्रांत अध्यक्ष श्री संजीव सिंह, प्रांत उपाध्यक्ष श्री राज किशोर सिंह, प्रांत मंत्री श्री रणवीर सिंह, प्रांत संगठन मंत्री श्री देवी सिंह के साथ-साथ संत रामानंद दास एवं संत भूषण दास ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर प्रांत कार्य समिति बैठक का औपचारिक उद्घाटन किया। इसके पश्चात मंगलाचरण के साथ बैठक की कार्यवाही आरंभ हुई। इस अवसर पर केंद्रीय मंत्री श्री अम्बरीष ने अपने विस्तृत एवं प्रेरक संबोधन में कहा कि विश्व हिंदू परिषद की स्थापना वर्ष 1964 में हिंदू समाज को संगठित करने, हिंदू जागरण और सांस्कृतिक मूल्यों की रक्षा के उद्देश्य से की गई थी। स्थापना काल से लेकर आज तक विश्व हिंदू परिषद निरंतर हिंदू एकता, धार्मिक चेतना एवं सामाजिक समरसता के लिए संघर्षशील रही है। उन्होंने कहा कि अयोध्या में भव्य श्रीराम मंदिर के निर्माण से पूर्व कई बड़े जन आंदोलन विश्व हिंदू परिषद के नेतृत्व में हुए, जिनमें असंख्य कार्यकर्ताओं ने त्याग और बलिदान दिया। केंद्रीय मंत्री ने वर्तमान सामाजिक परिस्थितियों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि आज देश में हिंदू समाज को और अधिक संगठित होने की आवश्यकता है। हिंदू है तो एक रहे, इस मूल मंत्र के साथ समाज को आगे बढ़ना होगा। उन्होंने कहा कि धार्मिक संस्कारों को जीवित रखने का कार्य सदैव हिंदू संतों ने किया है और आज आवश्यकता है कि हर घर में हिंदू संस्कृति, संस्कार और परंपराओं का भाव स्पष्ट रूप से दिखाई दे।
उन्होंने आगे कहा कि संस्कारी समाज का निर्माण, समाज में व्याप्त भेदभाव का अंत, धर्मांतरण को रोकना, लव जिहाद जैसी सामाजिक बुराइयों पर अंकुश लगाना, गौ रक्षा करना और अपनी सनातन संस्कृति के लिए समर्पित भाव से जीवन जीना—यही विश्व हिंदू परिषद का मूल कार्य है। संगठन के सेवा, गौ रक्षा, धर्म प्रचार, सामाजिक समरसता, प्रचार-प्रसार, धर्म जागरण, विधि प्रकोष्ठ, धर्माचार्य संपर्क, रामोत्सव, स्थापना दिवस, शौर्य दिवस, गोपाल अष्टमी, दुर्गा अष्टमी, धर्म रक्षा दिवस एवं सामाजिक समरसता दिवस जैसे विविध आयाम समाज के हर वर्ग से जुड़कर कार्य कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि जब हिंदू समाज संगठित और एकजुट रहता है, तो नफरत, घृणा और द्वेष फैलाने वाली कोई भी शक्ति टिक नहीं सकती। सभी हिंदू एक-दूसरे के सहोदर भाई हैं और समभाव के साथ जीवन जिएं, यही विश्व हिंदू परिषद की कामना है। हिंदू समाज यदि एक-दूसरे का सम्मान करते हुए कदम से कदम मिलाकर चले, तो हर प्रकार की चुनौती का सफलतापूर्वक सामना किया जा सकता है। केंद्रीय मंत्री ने भगवान श्रीराम के आदर्शों का उल्लेख करते हुए कहा कि हमें राम को केवल पूजना ही नहीं चाहिए, बल्कि यह भी विचार करना चाहिए कि राम का जीवन कैसा था और आज हमारी भूमिका क्या होनी चाहिए। श्रीराम के पदचिन्हों पर चलने का प्रयास करते हुए रामोत्सव की तैयारी करनी चाहिए, ताकि समाज में नैतिकता, मर्यादा और कर्तव्यबोध का भाव जागृत हो। उन्होंने समाज में व्याप्त कुरीतियों के अंत, देश की वर्तमान परिस्थितियों पर गंभीर चर्चा, जनगणना जैसे विषयों पर चिंतन एवं भविष्य की चुनौतियों से मुकाबले के लिए एकजुट होकर कार्य करने का आह्वान किया। तीन दिवसीय इस प्रांत कार्य समिति बैठक में उत्तर बिहार प्रांत के 31 जिलों से आए लगभग ढाई सौ कार्यकर्ता विभिन्न सत्रों में संगठनात्मक समीक्षा, आगामी कार्यक्रमों की रूपरेखा, सामाजिक चुनौतियों और कार्य विस्तार पर मंथन करेंगे। बैठक के समापन दिवस 5 जनवरी को कार्यक्रम के पश्चात नगर भ्रमण कार्यक्रम भी आयोजित किया जाएगा। कार्यक्रम की व्यवस्था एवं सफलता में अशोक उपाध्याय, अरविंद झा, रंजन कुमार सिंह, श्याम बाबू सिंह, दिग्विजय सिंह, चंदन कुमार, शंभु शौर्य, शिवजी साह, महंत राज नारायण दास, महंत बालकृष्ण दास, गुड्डू गिरी एवं संतोष देशमुख सहित अनेक कार्यकर्ताओं एवं संतों का सराहनीय योगदान रहा।
जानकी जन्मभूमि सीतामढ़ी में आयोजित यह बैठक न केवल संगठनात्मक दृष्टि से महत्वपूर्ण मानी जा रही है, बल्कि हिंदू समाज को एकजुट कर सांस्कृतिक, सामाजिक एवं राष्ट्रीय चेतना को और अधिक सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम के रूप में देखी जा रही है।

















