37वर्षों की सेवा के बाद भी देश और दुनिया के लिए सोच, गांधी के आदर्शों पर विश्व शांति की अपील
विजयीपुर/गोपालगंज
जीवन के 37 वर्ष देश की सुरक्षा और कानून व्यवस्था को समर्पित करने वाले सेवानिवृत्त रेलवे पुलिस बल के सब इंस्पेक्टर सुधाकर यादव के लिए वर्दी केवल नौकरी नहीं, बल्कि अनुशासन, सेवा और मानवता की पहचान रही है। कमर में सरकारी पिस्टल, बदन पर सितारों से सजी वर्दी और मन में निःस्वार्थ सेवा का भाव—यह पहचान भले ही सेवा निवृत्ति के साथ औपचारिक रूप से समाप्त हो गई हो, लेकिन उनका चिंतन और सामाजिक सरोकार आज भी उतना ही जीवंत है।
महात्मा गांधी की पुण्यतिथि पर बापू के आदर्शों को नमन करते हुए सुधाकर यादव ने विश्व शांति को लेकर जो बातें कहीं, वे किसी भाषण का हिस्सा नहीं थीं, बल्कि एक अनुभवी सेवक के जीवन अनुभवों से उपजी हुई सच्ची चिंता थीं। उनकी सरल, स्पष्ट और आत्मीय भाषा ने सुनने वालों को सोचने पर मजबूर कर दिया—ऐसा लगा मानो उनकी जुबान से उतरते विचार सीधे हमारी कलम तक पहुँच गए हों।
विजयीपुर प्रखंड के सीमावर्ती क्षेत्र ग्राम पिपरा विट्ठल, थाना भटनी निवासी सुधाकर यादव का मानना है कि यदि दुनिया के 195 देश हथियारों और युद्ध की होड़ छोड़कर शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और मानवता को प्राथमिकता दें, तो युद्ध, सीमा विवाद और हिंसा जैसी समस्याएँ स्वतः समाप्त हो सकती हैं। वे कहते हैं कि आज जो अरबों-खरबों रुपये परमाणु हथियारों, मिसाइलों और सैन्य तैयारियों पर खर्च हो रहे हैं, यदि वही संसाधन जनकल्याण में लगाए जाएँ, तो कोई भी देश गरीबी और असमानता से मुक्त हो सकता है।
गांधीजी के सत्य, अहिंसा और भाईचारे के सिद्धांतों को आज के समय में सबसे अधिक प्रासंगिक बताते हुए वे कहते हैं कि विश्व शांति का मार्ग ताकत के प्रदर्शन से नहीं, बल्कि संवाद, सहयोग और मानवीय मूल्यों से होकर जाता है। उनका विश्वास है कि जब हर नागरिक ईमानदारी और नैतिकता के साथ अपने कर्तव्यों का पालन करेगा, तभी एक समतामूलक और शांतिपूर्ण समाज का निर्माण संभव होगा।
सुधाकर यादव की यह सोच बताती है कि सेवानिवृत्ति केवल नौकरी से होती है, जिम्मेदारी और संवेदना से नहीं। बापू के आदर्शों से प्रेरित उनके विचार न केवल भारत, बल्कि पूरी दुनिया के 195 देशों के लिए प्रेरणादायी हैं। शायद यही कारण है कि उनकी कही बातें केवल सुनी नहीं गईं, बल्कि दिल में उतरती चली गईं।












