प्रखंड भवन के नाम पर कटे दशकों पुराने महुआ-आम के पेड़, विजयीपुर में उठा प्रकृति संरक्षण पर सवाल
विजयीपुर/गोपालगंज:
विजयीपुर प्रखंड परिसर में नए प्रखंड भवन के निर्माण के नाम पर लगभग 40–50 वर्ष पुराने महुआ और आम के पेड़ों को काट दिए जाने का मामला सामने आया है। पेड़ों के कटने से स्थानीय लोगों में नाराजगी देखी जा रही है और प्रकृति संरक्षण को लेकर कई सवाल खड़े हो रहे हैं।
बताया जा रहा है कि प्रखंड प्रांगण में वर्षों से खड़े ये महुआ और आम के पेड़ क्षेत्र की पहचान थे। स्थानीय लोगों का कहना है कि महुआ का पेड़ अब धीरे-धीरे विलुप्त होता जा रहा है, ऐसे में इन पुराने पेड़ों को बचाने की बजाय काट दिया जाना चिंता का विषय है। लोगों का मानना है कि आने वाली युवा पीढ़ी शायद ही महुआ का पेड़ देख पाए।
वहीं दूसरी ओर, सरकार और प्रशासन द्वारा “एक पेड़ मां के नाम” जैसे अभियानों के तहत बड़े-बड़े होर्डिंग लगाकर वृक्षारोपण के नाम पर लाखों रुपये खर्च किए जा रहे हैं। लेकिन उसी समय भवन निर्माण के नाम पर पुराने और बड़े पेड़ों को काटा जाना पर्यावरण संरक्षण के दावों पर सवाल खड़ा कर रहा है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि विकास जरूरी है, लेकिन विकास के साथ पर्यावरण संतुलन भी उतना ही जरूरी है। यदि निर्माण कार्य के दौरान पेड़ों को बचाने या उनके स्थान पर बड़े पैमाने पर पौधारोपण की व्यवस्था की जाए तो प्रकृति को होने वाले नुकसान को कुछ हद तक रोका जा सकता है।
इस घटना के बाद लोगों के बीच यह चर्चा तेज हो गई है कि क्या विकास के नाम पर हरियाली की बलि देना सही है, या फिर विकास के साथ प्रकृति संरक्षण के बीच संतुलन बनाने की जरूरत है।










