थावे मंदिर में ‘VIP दर्शन’ पर विवाद: अपनों में भेदभाव क्यों?
गोपालगंज ब्यूरो आशिष रंजन श्रीवास्तव की रिपोर्ट
गोपालगंज ।। प्रसिद्ध शक्तिपीठ थावे मंदिर एक बार फिर चर्चा में है, लेकिन इस बार वजह आस्था नहीं बल्कि प्रशासन का ‘दोहरा मापदंड’ है। बिहार सरकार के दो कद्दावर मंत्रियों के साथ मंदिर परिसर में हुए अलग-अलग व्यवहार ने राजनीतिक गलियारों और सोशल मीडिया पर बहस छेड़ दी है। बता दे की हाल ही में पंचायती राज मंत्री दीपक प्रकाश जी थावे मंदिर में मत्था टेकने पहुँचे थे। बताया जा रहा है कि उन्हें सामान्य प्रोटोकॉल के तहत दर्शन करने पड़े और उन्हें उस ‘VIP विशेष सुविधा’ से वंचित रहना पड़ा जिसकी अपेक्षा एक कैबिनेट मंत्री के लिए की जाती है, वहीं दूसरी ओर, एक अन्य प्रभावशाली मंत्री अशोक चौधरी जी के दौरे के दौरान नजारा बिल्कुल अलग था। उनके लिए न केवल रेड कार्पेट जैसी व्यवस्था दिखी, बल्कि उन्हें नियम ताक पर रखकर मंदिर के गर्भगृह तक प्रवेश कराया गया।
इस घटना के बाद श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों के बीच कई सवाल तैर रहे हैं।क्या मंदिर के नियम मंत्रियों के रसूख के हिसाब से बदलते हैं?
जिला प्रशासन और मंदिर कमेटी ने एक मंत्री को गर्भगृह में जाने की अनुमति दी, तो दूसरे के साथ सख्ती क्यों दिखाई? जहाँ आम भक्त घंटों लाइन में लगकर दर्शन करते हैं, वहाँ रसूखदारों के बीच भी ‘श्रेणी’ तय करना कहाँ तक उचित है?
गौरतलब है कि सुरक्षा और व्यवस्था के दृष्टिकोण से थावे मंदिर के गर्भगृह में आम लोगों का प्रवेश वर्जित रहता है। ऐसे में अशोक चौधरी जी को गर्भगृह तक ले जाना मंदिर के स्थापित नियमों का उल्लंघन माना जा रहा है। दूसरी तरफ, दीपक प्रकाश जी जैसे वरिष्ठ नेता के साथ हुए व्यवहार को उनके समर्थकों ने अपमानजनक बताया है।
मंदिर प्रशासन की इस कार्यप्रणाली ने ‘समानता’ के अधिकार पर प्रश्नचिह्न लगा दिया है। फिलहाल इस मामले पर मंदिर ट्रस्ट या जिला प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण नहीं आया है, लेकिन सोशल मीडिया पर लोग इसे “सत्ता के भीतर भी भेदभाव” का नाम दे रहे हैं।












