सेंट्रल बैंक के ग्राहक सेवा केंद्रों की मनमानी: निर्धारित गांवों में नहीं, बाजार में ठिकाने
ग्रामीणों की परेशानी बेकाबू, बैंक प्रबंधन खामोश
नौतन से फिरोज अंसारी की रिपोर्ट
ग्रामीण भारत की बैंकिंग पहुंच का सपना दिखाकर शुरू हुए ग्राहक सेवा केंद्र आज खुद ग्रामीणों के लिए सबसे बड़ी मुसीबत बन गए हैं। नौतन बाजार स्थित सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया की शाखा के अधीन 10 ग्राहक सेवा केंद्रों में से केवल तीन ही अपने निर्धारित जगहों पर संचालित हो रहे हैं। बाकी केंद्र मनमाने ढंग से नौतन बाजार व सेंट्रल बैंक की मुख्य शाखा के आसपास 300-400 मीटर के दायरे में ही चलाए जा रहे हैं। इससे सुदूर गांवों के गरीब किसान, मजदूर और महिलाएं मीलों पैदल चलकर या साधन जुटाकर बाजार आने को मजबूर हैं। लेकिन बैंक प्रबंधन इस पर पूरी तरह चुप्पी साधे बैठा है।
गौरतलब है कि मुरारपट्टी गांव निवासी भगवान कुमार गुप्ता, कादिरचक गांव निवासी मंजेश कुमार तथा नौतन निवासी आदित्य राज, इन तीनों लोगों के ग्राहक सेवा केंद्र निर्धारित जगह पर चल रहे हैं। इनके अलावा
जगदीशपुर, खलवां, नरकटिया, मैरवा, कुसौंधी, मुरारपट्टी पंचायत व रामनगर खलवां के नाम पर अधिकृत ग्राहक सेवा केंद्र या तो नौतन बाजार में चल रहे हैं या फिर इनके संचालकों के गांव या घर में चल रहे हैं। अगर ये सभी केंद्र अपने-अपने निर्धारित गांवों में होते, तो ग्रामीणों को नौतन बाजार आने की मजबूरी न होती। लेकिन बैंक प्रबंधन की ढुलमुल नीति और लापरवाही के चलते ग्राहक सेवा केंद्रों के संचालक ग्राहकों की सुविधा को ताक पर रखकर अपनी मर्जी से केंद्र चला रहे हैं। जिन गांवों के नाम पर ग्राहक सेवा केंद्र अधिकृत हैं, वहां भी योग्य स्थानीय युवा मौजूद हैं। फिर भी कोड दूसरे गांव या नौतन बाजार के लोगों को दे दिया गया। नतीजा यह है कि वे केंद्र गांवों की जगह बाजार में शिफ्ट हो जाते हैं। निर्धारित जगहों पर चलने वाले केंद्र इसलिए चल रहा है क्योंकि संचालक भगवान कुमार गुप्ता उसी गांव के हैं।
ग्रामीणों की व्यथा साफ है कि पैसे जमा करने, निकालने, खाता खोलने या सरकारी योजनाओं का लाभ लेने के लिए अब उन्हें मजबूरन नौतन बाजार आना पड़ता है। समय बर्बाद होता है, खर्च बढ़ता है और कई बार छोटी-मोटी जरूरतों के लिए बैंक जाना छोड़ भी देते हैं। यह सिर्फ एक स्थानीय समस्या नहीं, यह ग्रामीण बैंकिंग की मूल भावना पर सवाल है। रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया और सरकार की मंशा दूर-दराज के इलाकों तक बैंकिंग पहुंचाना है, न कि सब कुछ बाजार में केंद्रित करना।
ग्रामीणों की मांग है कि तत्काल जांच हो, ग्राहक सेवा केंद्रों को उनके निर्धारित स्थानों पर अनिवार्य रूप से चलाया जाए और भविष्य में बीसी कोड जारी करते समय स्थानीय निवास को प्राथमिकता दी जाए। सबसे बड़ा सवाल है कि क्या सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया अब जागेगा, या ग्रामीणों की यह परेशानी अनंत तक चलती रहेगी।










