भाजपा में अध्यक्ष बनते नहीं, तैयार किए जाते हैं – आशुतोष शंकर सिंह ।
डॉ. राहुल कुमार द्विवेदी, बिहार संपादक, अखंड भारत न्यूज़।
भाजपा में अध्यक्ष सिर्फ एक पद नहीं, बल्कि संगठन का आधार होता है। वह पार्टी को दिशा देता है, संतुलन बनाता है और पीढ़ियों के बीच एक सेतु बनकर खड़ा रहता है।
भाजपा का संगठनात्मक इतिहास अलग-अलग युगों की कहानी है। हर दौर में अध्यक्षों ने चुनौतियों का सामना किया, संगठन को गढ़ा, विचारों को जीवंत रखा और बूथ से लेकर शीर्ष तक मजबूत ढांचा खड़ा किया।
समय बदला, चुनौतियां बदलीं, लेकिन एक बात अडिग रही, ‘संगठन व्यक्ति से बड़ा रहेगा और विचार सत्ता से ऊपर’।
राष्ट्रीय अध्यक्षों के परिश्रम से आज भाजपा देश के कोने-कोने तक पहुंची है और दुनिया की सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टी बनी है।












