UGC के नए नियमों पर भड़का आक्रोश: देशभर के विश्वविद्यालयों में शिक्षकों और छात्रों का विरोध प्रदर्शन।
गोपालगंज।। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) द्वारा उच्च शिक्षा क्षेत्र में लागू किए गए हालिया बदलावों के खिलाफ देशभर के शैक्षणिक संस्थानों में विरोध की लहर दौड़ गई है। दिल्ली विश्वविद्यालय (DU), JNU और जामिया मिलिया इस्लामिया समेत कई बड़े संस्थानों के शिक्षक संघों और छात्र संगठनों ने इन नियमों को ‘शिक्षा विरोधी’ करार देते हुए सड़कों पर उतरने का फैसला किया है। आंदोलनकारियों ने मुख्य रूप से निम्नलिखित बिंदुओं पर आपत्ति जताई है, NET परीक्षा की अनिवार्यता और स्वरूप: छात्रों का तर्क है कि परीक्षा के पैटर्न में बार-बार बदलाव से ग्रामीण और पिछड़े क्षेत्रों के छात्रों के लिए अवसर कम हो रहे हैं। शिक्षकों का आरोप है कि नए नियम स्थायी नियुक्तियों के बजाय अनुबंध आधारित ‘गेस्ट फैकल्टी’ प्रथा को बढ़ावा दे रहे हैं, जिससे शिक्षा की गुणवत्ता और नौकरी की सुरक्षा प्रभावित हो रही है। विश्वविद्यालय शिक्षक संघों का कहना है कि UGC के नए ‘सेंट्रलाइज्ड’ नियम विश्वविद्यालयों की अपनी शैक्षणिक स्वायत्तता को खत्म कर रहे हैं। शोध (Research) के लिए नए पात्रता मानदंडों को लेकर भी छात्रों में असंतोष है, क्योंकि उन्हें डर है कि इससे शोध के दरवाजे सिर्फ संपन्न वर्ग के लिए खुलेंगे। DU शिक्षक संघ (DUTA) के एक वरिष्ठ सदस्य ने बताया, “हम शिक्षा के निजीकरण और केंद्रीयकरण के खिलाफ हैं। UGC को नियम बनाते समय शिक्षकों और छात्रों के व्यावहारिक जमीनी हालात को ध्यान में रखना चाहिए, न कि केवल कागजी सुधारों पर जोर देना चाहिए।” दूसरी ओर, UGC के अधिकारियों का कहना है कि ये बदलाव राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के अनुरूप हैं और इनका उद्देश्य भारतीय उच्च शिक्षा को अंतरराष्ट्रीय मानकों के समकक्ष लाना है। आयोग का तर्क है कि इन सुधारों से पारदर्शिता आएगी और नियुक्ति प्रक्रिया में तेजी आएगी। फिलहाल सरकार और प्रदर्शनकारियों के बीच गतिरोध बना हुआ है। यदि जल्द ही संवाद के जरिए समाधान नहीं निकाला गया, तो आगामी सत्र की परीक्षाओं और प्रवेश प्रक्रियाओं पर इसका गहरा असर पड़ सकता है।












