बागमती तटबंध उच्चीकरण में भारी अनियमितता का आरोप, उच्च स्तरीय जांच की मांग
सीतामढ़ी, ब्यूरो । बागमती नदी पर निर्मित बायां तटबंध के उच्चीकरण एवं सुदृढ़ीकरण कार्य में गंभीर अनियमितताओं को लेकर मामला तूल पकड़ता जा रहा है। समाजसेवी सह एंटी करप्शन के राष्ट्रीय संयोजक डॉ. एस. राज वर्मा ने जी.ए. इन्फ्रा प्राइवेट लिमिटेड कंपनी पर भारी वित्तीय व तकनीकी अनियमितताओं, मानक के विपरीत कार्य का गंभीर आरोप लगाते हुए जल संसाधन विभाग, बिहार सरकार के प्रधान सचिव संतोष कुमार मल्ल से मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने एक लिखित आवेदन सौंपकर पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच कराने एवं दोषी कंपनी के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की मांग की। डॉ. वर्मा ने अपने आवेदन में उल्लेख किया कि सीतामढ़ी, शिवहर एवं मुजफ्फरपुर जिलों में बागमती नदी के बायां तटबंध पर कराए जा रहे उच्चीकरण एवं सुदृढ़ीकरण कार्यों में विभागीय मानकों और तकनीकी दिशा-निर्देशों की खुलकर अनदेखी की जा रही है। कार्य में घटिया सामग्री के उपयोग, निर्धारित ऊंचाई व चौड़ाई के अनुरूप निर्माण न होने, मिट्टी भराई एवं पिचिंग कार्य में लापरवाही, तथा गुणवत्ता नियंत्रण के अभाव जैसे गंभीर आरोप लगाए गए हैं। उन्होंने कहा कि बागमती तटबंध बाढ़ नियंत्रण की दृष्टि से अत्यंत संवेदनशील संरचना है और इसमें किसी भी प्रकार की लापरवाही से लाखों लोगों के जीवन व संपत्ति को गंभीर खतरा हो सकता है। बावजूद इसके, ठेकेदार कंपनी द्वारा कार्य में मनमानी बरती जा रही है और स्थानीय स्तर पर शिकायतों के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं की जा रही। डॉ. एस. राज वर्मा ने प्रधान सचिव से आग्रह किया कि स्वतंत्र तकनीकी विशेषज्ञों की टीम गठित कर स्थल निरीक्षण कराया जाए, कार्य की गुणवत्ता की जांच हो तथा दोषी पाए जाने पर संबंधित कंपनी को ब्लैकलिस्ट करने, भुगतान रोकने और कानूनी कार्रवाई करने जैसे सख्त कदम उठाए जाएं। उन्होंने यह भी कहा कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो यह मामला बड़े घोटाले का रूप ले सकता है। प्रधान सचिव संतोष कुमार मल्ल ने आवेदन प्राप्त कर मामले को गंभीरता से देखने का आश्वासन दिया और नियमानुसार आवश्यक कार्रवाई करने की बात कही। इस मुलाकात के बाद क्षेत्र में चल रहे तटबंध कार्यों को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं और स्थानीय लोगों को उच्च स्तरीय जांच की उम्मीद जगी है।












