बाँदा: दबंगई से सहमीं बेटियाँ, न्याय की तलाश में माँ-बेटियाँ पहुँचीं एसपी दरबार
बाँदा। जनपद के बबेरू कोतवाली क्षेत्र के ग्राम पंचायत मुरवल में कथित दबंगई और भय का माहौल होने का मामला सामने आया है। गांव की रहने वाली एक माँ और उसकी बेटियों ने पुलिस अधीक्षक को शिकायती पत्र देकर न्याय की गुहार लगाई है। पीड़ित परिवार का आरोप है कि गांव में दबंगों के कारण बेटियाँ सुरक्षित नहीं हैं और कई महीनों से शिकायत के बावजूद उन्हें न्याय नहीं मिल पा रहा है।
पीड़िता ने आरोप लगाया कि वह स्कूल प्री-बोर्ड परीक्षा देने जा रही थी, तभी रास्ते में ग्राम प्रधान के पुत्र और उसके कुछ साथियों ने उसे रोक लिया। इस दौरान आरोपियों ने उसका हाथ पकड़कर खींचा, छेड़छाड़ की और अभद्र गालियाँ दीं। घटना के कारण उसका एक प्री-बोर्ड परीक्षा का पेपर भी छूट गया। पीड़िता का कहना है कि आरोपियों के डर से वह और उसका परिवार लगातार भय के साये में जीने को मजबूर हैं।
ग्रामीणों का आरोप है कि ग्राम प्रधान के पति रामबाबू निषाद, जो कथित रूप से हिस्ट्रीशीटर अपराधी बताए जा रहे हैं, अपने प्रभाव के बल पर गांव में दबदबा बनाए हुए हैं। पीड़ित पक्ष का कहना है कि आरोपियों का इतना प्रभाव है कि स्थानीय पुलिस भी उनके खिलाफ कार्रवाई करने से बचती नजर आती है।
न्याय की उम्मीद में पीड़िता अपनी फरियाद लेकर लखनऊ तक मुख्यमंत्री से मिलने पहुँची, लेकिन उसे मुलाकात का अवसर नहीं मिल सका। पीड़ित परिवार का कहना है कि पिछले दो-तीन महीनों से वे न्याय के लिए दर-दर भटक रहे हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।
बताया जा रहा है कि प्रधान पति रामबाबू निषाद पर पहले से ही लूट, अपहरण और दुष्कर्म जैसे गंभीर आरोपों से जुड़े एक दर्जन से अधिक मुकदमे दर्ज हैं, बावजूद इसके वह खुलेआम घूम रहा है।
ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि जब प्रदेश सरकार “बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ” और भयमुक्त समाज का दावा कर रही है, तो मुरवल गांव की बेटियाँ आखिर कब तक डर के साये में जीने को मजबूर रहेंगी और पीड़ित परिवार को न्याय कब मिलेगा।










