रेल मंत्रालय का ‘कॉपी-पेस्ट’ खेल? एक ही लेटर नंबर पर दो नेताओं को मिली खुशखबरी। आखिर कौन सा लेटर है सही..??
गोपालगंज ब्यूरो आशिष रंजन श्रीवास्तव की ख़ास रिपोर्ट
गोपालगंज।। सरकारी कामकाज में ‘क्लेरिकल मिस्टेक’ कोई नई बात नहीं है, लेकिन जब मामला सीधे केंद्रीय मंत्री के दफ्तर और माननीय जनप्रतिनिधियों से जुड़ा हो, तो सवाल उठना लाजिमी है। सोशल मीडिया पर रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव के लेटरहेड पर जारी दो ऐसे पत्र वायरल हो रहे हैं, जिन्होंने विभाग की कार्यप्रणाली पर चुटकी लेने का मौका दे दिया है।


क्या है पूरा मामला?
मामला थावे-पटना इंटरसिटी रेलगाड़ी (03215/03216) के नियमित परिचालन की मंजूरी से जुड़ा है। रेल मंत्री की ओर से दो अलग-अलग नेताओं को पत्र लिखकर इसकी जानकारी दी गई है, लेकिन हैरान करने वाली बात यह है कि दोनों ही पत्रों का डिस्पैच नंबर (No. 2026/Chg/16/ECR/9) बिल्कुल एक ही है। ये पत्र दो नेताओं को मिला है जिसमे पहले डॉ. आलोक कुमार सुमन: माननीय सांसद (लोकसभा), गोपालगंज है तो वही दूसरा पत्र मिथिलेश तिवारी: माननीय सदस्य, बिहार विधान सभा को मिला है। आमतौर पर हर आधिकारिक पत्र का एक विशिष्ट (Unique) नंबर होता है ताकि रिकॉर्ड सुरक्षित रहे। लेकिन यहाँ दोनों पत्रों में शब्द-दर-शब्द समानता है, बस प्राप्तकर्ता का नाम और उनके द्वारा लिखे गए पत्र की तारीख बदली गई है। सांसद डॉ. आलोक सुमन के पत्र में उनके 20.12.2025 के पत्र का संदर्भ है जबकि मिथिलेश तिवारी के पत्र में उनके 19.12.2025 के पत्र का संदर्भ है।
जनता के बीच श्रेय लेने की होड़ में अक्सर नेता सक्रिय रहते हैं, लेकिन मंत्रालय के एक ही ‘लेटर नंबर’ ने इस श्रेय की लड़ाई को एक तकनीकी उलझन में डाल दिया है। लोग पूछ रहे हैं कि क्या यह मंत्रालय की भारी चूक है या फिर एक ही फाइल पर सबको खुश करने का ‘शॉर्टकट’? वजह जो भी हो, थावे और पटना के बीच चलने वाली इस ट्रेन के नियमित होने की खबर से क्षेत्र की जनता तो खुश है, पर रेल मंत्री के दफ्तर की इस ‘जुड़वा’ चिट्ठी ने विभाग की सतर्कता पर हल्के-फुल्के सवाल जरूर खड़े कर दिए हैं।
फिलहाल इस पत्र के उपर रेल मंत्रालय का कोई भी आधिकारिक बयान नहीं आया है। अब देखना ये है की इस पर रेल मंत्रालय का क्या बयान आता है..? साथ ही ये भी सोचने वाली बात है की आखिर इन दोनों नेताओं मे से किस नेता का पत्र सही है..?














