यूजीसी के नए बिल से देश में सामाजिक और छात्र स्तर पर बढ़ेगा मतभेद, सरकार तुरंत वापस ले फैसला : सवर्ण समाज
सीतामढ़ी।
डॉ. राहुल कुमार द्विवेदी , बिहार संपादक, अखंड भारत न्यूज़।
अवनीश सिंह,जिला भाजपा मंत्री सीतामढ़ी ने केंद्र सरकार द्वारा लाया गया नया यूजीसी (UGC) बिल अब केवल शिक्षा व्यवस्था तक सीमित न रहकर देश में सामाजिक और राजनीतिक मतभेद को जन्म देता नजर आ रहा है। बुद्धिजीवियों और सामाजिक विश्लेषकों का मानना है कि यह बिल छात्रों के बीच असंतोष बढ़ाने के साथ-साथ देश के एक बड़े सामाजिक वर्ग को भी आंदोलित कर सकता है।
अभिषेक मिश्रा का कहना है कि इससे पहले कांग्रेस सरकार पर हिंदू विरोधी नीतियों के आरोप लगे थे, जिसका परिणाम भारतीय जनता पार्टी के उभार के रूप में सामने आया। लेकिन अब जब से भाजपा सत्ता में आई है, तब से उस पर स्वर्ण समाज—ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य और भूमिहार—वर्ग के विरोध में काम करने के आरोप लग रहे हैं।
राजनीतिक हलकों में यह भी चर्चा तेज है कि यह पूरा घटनाक्रम वर्ष 2027 में होने वाले उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से जुड़ा हुआ है। योगी आदित्यनाथ को सत्ता से बाहर करने की रणनीति के तहत ऐसे फैसले लिए जा रहे हैं, जिनसे पारंपरिक रूप से भाजपा से जुड़े समाजों में असंतोष पैदा हो।
प्रिंस तिवारी भाजपा नेता ने कहा कि उत्तर प्रदेश में ब्राह्मण और क्षत्रिय समाज पहले से ही कई मुद्दों को लेकर नाराज चल रहा है और यूजीसी के नए नियमों ने इस नाराजगी को पूरे देश में फैला दिया है।
डॉ.धीरज कुमार मिश्रा शिक्षाविद का कहना है कि यूजीसी के नए प्रावधानों से शिक्षा की स्वायत्तता, नियुक्ति प्रक्रिया और अकादमिक संतुलन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा, जिसका सीधा असर छात्रों और शिक्षकों दोनों पर पड़ेगा। इससे समाज के विभिन्न वर्गों के बीच अविश्वास और विभाजन की स्थिति बन सकती है।
डॉ.एस के वर्मा का स्पष्ट कहना है कि यदि सरकार ने समय रहते इस बिल को वापस नहीं लिया, तो इसके गंभीर राजनीतिक परिणाम सामने आ सकते हैं। उनका कहना है कि यदि हिंदू समाज ही आपस में बंट गया, तो भारतीय जनता पार्टी का आधार भी कमजोर होगा और तब यह सवाल उठेगा कि भाजपा किसके सहारे राजनीति करेगी।
समाज के प्रबुद्ध वर्गों और छात्र संगठनों ने केंद्र सरकार से मांग की है कि वह यूजीसी बिल पर पुनर्विचार करे और सभी वर्गों से संवाद स्थापित कर इस फैसले को वापस ले। अन्यथा आने वाले समय में देशव्यापी विरोध और राजनीतिक अस्थिरता से इनकार नहीं किया जा सकता।












