भोरे में आइसा का राज्यव्यापी प्रतिरोध मार्च, छात्राओं पर बढ़ते अत्याचार और भाजपा नेताओं के बयानों का किया विरोध
भोरे/गोपालगंज
गोपालगंज जिले के भोरे प्रखंड में भाकपा (माले) के तत्वावधान में आइसा द्वारा राज्यव्यापी प्रतिरोध मार्च निकाला गया। यह मार्च पटना, बक्सर, छपरा, खगड़िया और मधेपुरा में छात्राओं के साथ हुई बलात्कार की घटनाओं तथा भाजपा नेताओं द्वारा दिए गए अपमानजनक और महिला विरोधी बयानों के विरोध में आयोजित किया गया।
मार्च को संबोधित करते हुए जेएनयू के पूर्व अध्यक्ष धनंजय ने कहा कि भाजपा–आरएसएस की राजनीति मूल रूप से महिला विरोधी है। उन्होंने आरोप लगाया कि एक ओर भाजपा महिला सशक्तिकरण के नारे देती है, वहीं दूसरी ओर उसके नेता और उसकी वैचारिक धारा पितृसत्तात्मक, अपमानजनक और असंवेदनशील बयान व नीतियां आगे बढ़ा रही हैं।
धनंजय ने कहा कि शिक्षा बजट में कटौती, शिक्षा के बढ़ते निजीकरण और छात्रवृत्तियों में कमी के जरिए खासकर गरीब, दलित, पिछड़े और अल्पसंख्यक समुदायों की लड़कियों को शिक्षा से दूर किया जा रहा है। उन्होंने नैतिक पुलिसिंग, पहनावे, विचार और निजी जीवन में दखल के माध्यम से महिलाओं की स्वतंत्रता पर हो रहे लगातार हमलों पर भी गहरी चिंता जताई।
उन्होंने आरोप लगाया कि आरएसएस की विचारधारा समाज में नफरत, भय और असहिष्णुता को बढ़ावा देकर सामाजिक ताने-बाने को कमजोर कर रही है, जिससे अराजकता का माहौल बन रहा है और महिलाओं की सुरक्षा व गरिमा पर खतरा बढ़ता जा रहा है।
आइसा नेता प्रभात कुशवाहा ने हाल ही में भाजपा के एक नेता द्वारा बिहार की बेटियों को “खरीदने” जैसे अपमानजनक बयान की कड़ी निंदा की। उन्होंने सवाल उठाया कि जब नितिन नवीन को भाजपा का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाए जाने पर पार्टी ने इसे “बिहार के लिए गौरव का क्षण” बताया था, तो आज उसी भाजपा का एक नेता बिहार की बेटियों को बिकाऊ कहने की मानसिकता कैसे दिखा रहा है।
आइसा नेताओं ने सवाल उठाया कि क्या नितिन नवीन बिहार की बेटियों के सम्मान के पक्ष में खड़े होंगे और संबंधित नेता को पार्टी से बर्खास्त करेंगे। उन्होंने स्पष्ट कहा कि यदि बिहार की बेटियों को अपमानित करने वाले नेताओं पर कार्रवाई नहीं होती है, तो नितिन नवीन का राष्ट्रीय अध्यक्ष होना बिहार के लिए शर्मनाक होगा।
आइसा ने आरोप लगाया कि भाजपा की चुप्पी यह साबित करती है कि उसकी राजनीति महिलाओं के खिलाफ है और वह महिलाओं पर होने वाले अत्याचारों के मामलों में लगातार अपराधियों और असंवेदनशील तत्वों को संरक्षण देती रही है।












