सीतामढ़ी में शिक्षा व्यवस्था पर सख्ती, डीईओ का औचक निरीक्षण से बीआरसी में मचा हड़कंप
डॉ.राहुल कुमार द्विवेदी, बिहार संपादक, अखंड भारत न्यूज़।
जिले में शिक्षा व्यवस्था को पारदर्शी एवं जवाबदेह बनाने की दिशा में जिला शिक्षा पदाधिकारी (डीईओ) राघवेन्द्र मणि त्रिपाठी ने सख्त रुख अपनाया है। इसी क्रम में उन्होंने प्रखंड संसाधन केंद्र (बीआरसी) का औचक निरीक्षण किया, जहां निरीक्षण के समय प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी (बीईओ) अनुपस्थित पाए गए। डीईओ के अचानक पहुंचने से बीआरसी परिसर में हड़कंप मच गया। निरीक्षण के दौरान डीईओ को नवपदस्थापित प्रधानाध्यापकों से अवैध वसूली किए जाने की गंभीर शिकायत प्राप्त हुई। बताया गया कि पदस्थापन एवं अन्य प्रशासनिक कार्यों के नाम पर कुछ स्तरों पर अवैध मांग की जा रही है। इस शिकायत को गंभीरता से लेते हुए डीईओ राघवेन्द्र मणि त्रिपाठी ने संबंधित बीईओ से 24 घंटे के भीतर लिखित स्पष्टीकरण तलब किया है। डीईओ ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यदि स्पष्टीकरण संतोषजनक नहीं पाया गया तो कड़ी विभागीय कार्रवाई की जाएगी।
निरीक्षण के क्रम में एक शिक्षक का प्रतिनियोजन भी नियमों के विरुद्ध पाए जाने पर तत्काल प्रभाव से रद्द कर दिया गया। डीईओ ने कहा कि जिले में किसी भी प्रकार की अनियमितता, सिफारिश या नियमों की अनदेखी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। शिक्षा विभाग में कार्यरत सभी अधिकारी एवं कर्मचारी अपने दायित्वों का निर्वहन ईमानदारी और समयबद्धता से करें। इसके साथ ही डीईओ ने मध्याह्न भोजन (एमडीएम) योजना को लेकर भी सख्त निर्देश जारी किए। उन्होंने स्पष्ट किया कि विद्यालयों में कार्यरत रसोइयों से योजना से इतर कोई भी कार्य नहीं कराया जाएगा। रसोइयों को केवल मध्याह्न भोजन से संबंधित कार्यों में ही लगाया जाए। यदि कहीं भी रसोइयों से अन्य कार्य कराए जाने की शिकायत मिलती है तो संबंधित प्रधानाध्यापक एवं जिम्मेदार पदाधिकारियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जाएगी। डीईओ ने कहा कि मध्याह्न भोजन योजना बच्चों के पोषण से जुड़ी अत्यंत महत्वपूर्ण योजना है, इसमें किसी भी प्रकार की लापरवाही या शोषण स्वीकार्य नहीं है। रसोइयों का सम्मान और उनके अधिकारों की रक्षा करना विभाग की प्राथमिकता है। निरीक्षण के दौरान डीईओ ने बीआरसी के अभिलेखों, उपस्थिति पंजी एवं विभिन्न योजनाओं की समीक्षा की तथा कई आवश्यक दिशा-निर्देश भी दिए। उन्होंने चेतावनी दी कि भविष्य में भी इस प्रकार के औचक निरीक्षण जारी रहेंगे, ताकि शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता बनी रहे और भ्रष्टाचार पर पूर्णतः अंकुश लगाया जा सके। डीईओ की इस कार्रवाई से शिक्षा विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों में स्पष्ट संदेश गया है कि लापरवाही, भ्रष्टाचार और नियमों की अनदेखी पर अब सख्त कार्रवाई तय है। जिले में शिक्षा व्यवस्था को सुधारने के लिए यह कदम महत्वपूर्ण माना जा रहा है।












