बिहार के मंत्री अशोक चौधरी की संपत्ति में 5 साल में बड़ा उछाल
बिहार संपादक डॉ राहुल कुमार द्विवेदी की रिपोर्ट


लगता है बिहार सरकार के वरिष्ठ मंत्री अशोक चौधरी के पास पैसे छापने की मशीन है। दरअसल, एक बार फिर अशोक चौधरी की संपत्ति को लेकर राजनीतिक और सार्वजनिक हलकों में चर्चा तेज़ हो गई है। इसकी वजह है साल 2020 और 2025 के बीच उनकी और उनकी पत्नी की संपत्ति में दिखाई देने वाला असाधारण इज़ाफ़ा।
सरकारी दस्तावेज़ों और सार्वजनिक घोषणाओं के आधार पर देखें तो पांच वर्षों में यह बढ़ोतरी सामान्य आय-वृद्धि से कहीं अधिक नज़र आती है।
2020 में संपत्ति की स्थिति
उपलब्ध चुनावी और सार्वजनिक हलफनामों के अनुसार, वर्ष 2020 के आसपास अशोक चौधरी की कुल संपत्ति एक करोड़ रुपये से कम, लगभग 70–80 लाख रुपये के दायरे में आंकी जाती है।
इसमें बैंक जमा, सीमित चल संपत्ति और पारिवारिक हिस्सेदारी की भूमि शामिल थी।
2025 में घोषित संपत्ति
दिसंबर 2025 में बिहार सरकार को सौंपे गए नवीनतम संपत्ति विवरण में अशोक चौधरी की कुल संपत्ति लगभग 42 करोड़ 68 लाख रुपये बताई गई।
इस घोषणा में यह भी सामने आया कि:
उनके स्वयं के नाम पर बैंक जमा और निवेश कई गुना बढ़े हैं
उनकी पत्नी के नाम पर भी करोड़ों रुपये की चल संपत्ति दर्ज है
संपत्ति क्यों बढ़ी?
अशोक चौधरी और उनके परिवार पर आरोप है कि उन्होंने परिवार से जुड़े ट्रस्टों के माध्यम से बड़े पैमाने पर भूमि खरीद की गई, जिसकी कुल कीमत सैकड़ों करोड़ रुपये तक बताई गई। अब तक इन आरोपों पर किसी अदालत या जांच एजेंसी का अंतिम निष्कर्ष सामने नहीं आया है लेकिन बिहार जैसे गरीब राज्य में जिस तरह से अशोक चौधरी की संपत्ति बढ़ी है वह जांच का विषय तो जरूर है।
यह मामला बिहार की राजनीति में एक बार फिर उस सवाल को सामने लाता है, जो अक्सर उठता रहा है- क्या जनप्रतिनिधियों की संपत्ति में अचानक और तेज़ बढ़ोतरी की स्वतंत्र और संस्थागत जांच होनी चाहिए? कानूनी रूप से अशोक चौधरी की घोषित संपत्ति फिलहाल वैध मानी जाती है, लेकिन राजनीतिक और नैतिक बहस जारी है।













