बिहार के शिक्षा मंत्री के गृह जिला के शिक्षा विभाग कार्यालय में ‘बंटी-बबली’ की दस्तक, शराबबंदी के दावों की निकली हवा।
गोपालगंज ब्यूरो आशीष रंजन श्रीवास्तव की रिपोर्ट
गोपालगंज। बिहार में पूर्ण शराबबंदी लागू है, लेकिन बिहार के शिक्षा मंत्री के गृह जिले गोपालगंज से एक ऐसी तस्वीर सामने आई है जिसने विभाग की शुचिता और प्रशासन की मुस्तैदी पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मंगलवार की सुबह जिला शिक्षा विभाग कार्यालय के शौचालय में भारी मात्रा में देशी शराब के खाली टेट्रा पैक्स (बंटी-बबली) पाए गए। शिक्षा विभाग में इन खाली पैकेटों के मिलने के बाद गलियारों में चर्चाओं का बाजार गर्म है। लोग चुटकी लेते हुए कह रहे हैं कि शायद ये ‘बंटी और बबली’ विभाग में TRE 4 (शिक्षक नियुक्ति) की प्रक्रिया को तेज कराने पहुंचे थे। चर्चाएं यहीं नहीं रुकीं, कुछ लोगों ने तंज कसते हुए कहा की क्या ये पैकेट वेतन विसंगति दूर करने के लिए परामर्श देने आए थे? या शारीरिक शिक्षकों की बहाली की रुकी हुई फाइलें ढूंढने के लिए इन्होंने विभाग में डेरा डाला था?
यह एक अत्यंत संवेदनशील मामला है। शिक्षा जैसे पवित्र और महत्वपूर्ण विभाग के जिला मुख्यालय में शराब का पहुंचना और वहां उसका सेवन होना प्रशासन की नाक के नीचे चल रहे काले खेल को उजागर करता है। जब आम आदमी को कार्यालय में प्रवेश के लिए सौ औपचारिकताएं निभानी पड़ती हैं, तो शराब की खेप वहां कैसे पहुंच रही है? मद्य निषेध विभाग और स्थानीय पुलिस को शराबियों को पकड़ने का जो ‘टारगेट’ दिया जाता है, क्या वह केवल गरीब और लाचार लोगों के लिए है? क्या कार्यालय के कर्मचारी या अधिकारी इस पूरे घटनाक्रम से अनजान हैं, या यह मिलीभगत का परिणाम है?
एक तरफ सरकार युवाओं को रोजगार देने के लिए नियुक्तियों का विज्ञापन निकाल रही है, वहीं दूसरी तरफ विभाग के भीतर का यह अनुशासनहीन माहौल राज्य की छवि को धूमिल कर रहा है। ‘बंटी और बबली’ का शिक्षा विभाग के शौचालय तक पहुंच जाना यह साबित करता है कि जमीन पर शराबबंदी के दावे कितने खोखले हैं। स्थानीय जनता अब जवाब मांग रही है कि क्या शिक्षा के मंदिर में अब ‘नशे का पाठ’ पढ़ाया जाएगा?
यह घटना केवल शराबबंदी की विफलता नहीं, बल्कि प्रशासनिक तंत्र के भीतर नैतिक पतन का संकेत है। जब तक विभाग के भीतर बैठे जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई नहीं होगी, तब तक ऐसे ‘अवांछित तत्व’ विभाग के गलियारों में घूमते रहेंगे।












