विश्व हिंदू परिषद उत्तर बिहार प्रांत कार्य समिति बैठक का भव्य समापन
डॉ.राहुल कुमार द्विवेदी, बिहार संपादक, अखंड भारत न्यूज़।
जानकी जन्मभूमि सीतामढ़ी स्थित सिद्धिविनायक होटल के सभागार में आयोजित विश्व हिंदू परिषद (विहिप) उत्तर बिहार प्रांत की तीन दिवसीय प्रांत कार्य समिति बैठक का सोमवार को भव्य एवं प्रेरणादायी वातावरण में समापन हुआ। समापन सत्र में उत्तर बिहार प्रांत प्रचारक रविशंकर जी, विश्व हिंदू परिषद के केंद्रीय मंत्री अम्बरीष जी, क्षेत्र अधिकारी डॉ. वीरेंद्र साहू, प्रांत अध्यक्ष संजीव सिंह, प्रांत उपाध्यक्ष राज किशोर सिंह, प्रांत मंत्री रणवीर सिंह, प्रांत संगठन मंत्री देवी सिंह सहित अनेक संत-महात्मा एवं संगठन के वरिष्ठ पदाधिकारी उपस्थित रहे। समापन सत्र के मुख्य अतिथि संत भूषण दास, संत बालकृष्ण दास एवं संत गोपाल दास की गरिमामयी उपस्थिति में कार्यक्रम संपन्न हुआ। इस अवसर पर उत्तर बिहार के 31 जिलों से आए लगभग ढाई सौ कार्यकर्ताओं ने संगठनात्मक, सामाजिक एवं सांस्कृतिक विषयों पर मंथन किया। समापन सत्र को संबोधित करते हुए विहिप के केंद्रीय मंत्री अम्बरीष जी ने कहा कि विश्व हिंदू परिषद की स्थापना वर्ष 1964 में हिंदू समाज को संगठित करने, हिंदू जागरण एवं सांस्कृतिक संरक्षण के उद्देश्य से की गई थी। तब से लेकर आज तक विहिप निरंतर संघर्षशील रहते हुए हिंदू समाज के हित में कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि अयोध्या में भव्य राम मंदिर निर्माण से पूर्व अनेक बड़े आंदोलन विश्व हिंदू परिषद के नेतृत्व में हुए, जो हिंदू समाज की एकजुटता और संकल्प का प्रतीक हैं। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि आज देश में हिंदू समाज को और अधिक संगठित होने की आवश्यकता है। हिंदू है तो एक रहे का भाव समाज में जागृत करना समय की मांग है। धार्मिक संस्कारों को जीवित रखने का कार्य हमारे संतों ने सदैव किया है, अब प्रत्येक परिवार का दायित्व है कि उनके घरों में हिंदू संस्कृति और संस्कार स्पष्ट रूप से दिखाई दें। उन्होंने कहा कि संस्कारी समाज का निर्माण, सामाजिक भेदभाव का अंत, धर्म परिवर्तन एवं लव जिहाद पर रोक, गौ रक्षा तथा अपनी संस्कृति के लिए समर्पित जीवन जीना—यही विश्व हिंदू परिषद का मूल उद्देश्य है। अम्बरीष जी ने कहा कि संगठन के सभी आयाम अपने-अपने क्षेत्र में सेवा कार्यों के माध्यम से समाज से जुड़े हुए हैं। यदि हिंदू समाज संगठित और एकजुट रहता है, तो नफरत, घृणा और द्वेष फैलाने वाली कोई भी शक्ति सफल नहीं हो सकती। उन्होंने हिंदू समाज को सहोदर भाई बताते हुए समभाव से जीवन जीने की कामना की। साथ ही कहा कि यदि हम एक-दूसरे का सम्मान करते हुए कदम से कदम मिलाकर चलें, तो हर चुनौती का सामना कर सकते हैं। उन्होंने भगवान राम के जीवन से प्रेरणा लेने का आह्वान करते हुए कहा कि हमें केवल राम की पूजा ही नहीं करनी चाहिए, बल्कि यह भी विचार करना चाहिए कि राम की भूमिका क्या थी और आज हमारी भूमिका क्या होनी चाहिए। राम के पदचिन्हों पर चलने का प्रयास ही सच्चा रामोत्सव होगा। समाज में व्याप्त बुराइयों के अंत, देश की परिस्थितियों पर गंभीर चर्चा, जनगणना जैसे विषयों पर चिंतन एवं भविष्य की चुनौतियों से निपटने के लिए एकजुट प्रयास की आवश्यकता पर भी उन्होंने बल दिया। उन्होंने बताया कि विश्व हिंदू परिषद द्वारा सेवा, गौ रक्षा, धर्म प्रचार, सामाजिक समरसता, प्रचार-प्रसार, धर्म जागरण, विधि प्रकोष्ठ, धर्माचार्य संपर्क, रामोत्सव, स्थापना दिवस, शौर्य दिवस, गोपाल अष्टमी, दुर्गा अष्टमी, धर्म रक्षा दिवस एवं सामाजिक समरसता दिवस जैसे कार्यक्रमों के माध्यम से समाज में निरंतर कार्य किया जाता है। उत्तर बिहार संभाग के प्रांत प्रचारक रविशंकर जी ने अपने संबोधन में कहा कि हिंदू समाज को संगठित होकर देश की संस्कृति के प्रति स्पष्ट ध्येय रखना चाहिए और अपनी संस्कृति पर सदैव गर्व करना चाहिए। उन्होंने पंच परिवर्तन को जीवन में अपनाने का आह्वान करते हुए कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने सौ वर्ष पूर्ण किए हैं और यह ईश्वरीय कार्य होने के कारण ही संभव हो पाया है।
उन्होंने कहा कि संघ का आरंभ उपेक्षा और उपहास से हुआ, अनेक संघर्षों का सामना करना पड़ा, यहां तक कि तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के कार्यकाल में संघ पर प्रतिबंध भी लगाया गया, किंतु इसके बावजूद संघ ने समाजहित में निरंतर कार्य किया और आज सौ वर्षों की यात्रा पूर्ण की। समाज की विसंगतियों को दूर कर समभाव के साथ कार्य करना ही संघ एवं उसके अनुषांगिक संगठनों का लक्ष्य है। रविशंकर जी ने जातिवाद, क्षेत्रवाद, छुआछूत, लव जिहाद एवं धर्म परिवर्तन जैसी सामाजिक चुनौतियों के विरुद्ध संगठित प्रयास की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि रचनात्मक और संगठनात्मक हिंदुत्व के माध्यम से ही हिंदू एकता सुदृढ़ हो सकती है। आत्मविस्मृत समाज को स्वबोध से ऊपर राष्ट्रबोध की आवश्यकता है। उन्होंने सामाजिक सद्भाव, कुटुंब प्रबोधन, सामाजिक समरसता, पर्यावरण संरक्षण एवं नागरिक कर्तव्यों के पालन का संकल्प लेने का आह्वान किया। उन्होंने अधिक से अधिक वृक्षारोपण, जल संरक्षण, ऊर्जा की बचत, प्लास्टिक के उपयोग से परहेज, सड़क यातायात नियमों का पालन तथा संविधान के सम्मान पर जोर दिया। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि वर्ष 2047 तक भारत विश्व गुरु एवं विश्व शक्ति बनेगा और भारत माता परम वैभवशाली होगी। तीन दिवसीय इस प्रांत कार्य समिति बैठक में संगठनात्मक समीक्षा, भावी कार्यक्रमों की रूपरेखा तथा समाजसेवा से जुड़े विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई। समापन के पश्चात कार्यकर्ताओं द्वारा नगर भ्रमण कार्यक्रम भी आयोजित किया गया, जिससे जनमानस में संगठन के संदेश का प्रसार हुआ। इस अवसर पर सामाजिक कार्यकर्ताओं में डॉ. वरुण कुमार, प्रांत कार्यवाह अभय गर्ग, विभाग कार्यवाह डॉ. राज किशोर सिंह, सह विभाग कार्यवाह जय किशोर साह, विभाग संपर्क प्रमुख सीता संवाद निदेशक आग्नेय कुमार, डॉ. देवेश कुमार एवं वार्ड पार्षद अमृतेश कुमार मिश्रा सहित अनेक गणमान्य लोग उपस्थित रहे। सीतामढ़ी विभाग द्वारा सभी अतिथियों को अंगवस्त्र प्रदान कर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम की व्यवस्था एवं सफलता में अशोक उपाध्याय, अरविंद झा, रंजन कुमार सिंह, श्याम बाबू सिंह, दिग्विजय सिंह, चंदन कुमार, शंभु शौर्य, शिवजी साह, महंत राज नारायण दास, महंत बालकृष्ण दास, गुड्डू गिरी एवं संतोष देशमुख सहित अनेक कार्यकर्ताओं का सराहनीय योगदान रहा।












