जिला भाजपा कार्यालय में अटल जी की 101 वीं जयंती श्रद्धा और संकल्प के साथ मनाई गई
डॉ.राहुल कुमार द्विवेदी, बिहार संपादक, अखंड भारत न्यूज़।
भारत रत्न, प्रख्यात कवि, ओजस्वी वक्ता और देश के पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की 101 वीं जन्म जयंती के अवसर पर सीमरा स्थित जिला भारतीय जनता पार्टी कार्यालय में भावपूर्ण एवं गरिमामय कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस अवसर पर सीतामढ़ी के पूर्व नगर विधायक सह प्रदेश प्रवक्ता डॉ. मिथिलेश कुमार सहित भाजपा कार्यकर्ता, पदाधिकारी, जनप्रतिनिधि एवं गणमान्य नागरिक बड़ी संख्या में उपस्थित रहे और अटल जी के तैल चित्र पर पुष्प अर्पित कर उन्हें नमन किया। कार्यक्रम की शुरुआत अटल जी के तैलचित्र पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्वलन के साथ हुई। उपस्थित पूर्व विधायक डॉ. मिथिलेश ने उनके व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर विस्तृत रूप से प्रकाश डालते हुए कहा कि अटल बिहारी वाजपेयी न केवल एक कुशल प्रशासक और दूरदर्शी राजनेता थे, बल्कि वे राजनीति में शालीनता, संवाद और सहमति की संस्कृति के प्रतीक भी थे। उन्होंने कहा कि अटल जी का जीवन राष्ट्रसेवा, लोकतांत्रिक मूल्यों और मानवीय संवेदनाओं से ओत-प्रोत रहा।
पूर्व विधायक सह प्रवक्ता डॉ मिथिलेश ने कहा कि अटल जी ने भारत को वैश्विक मंच पर नई पहचान दिलाई। पोखरण परमाणु परीक्षण, स्वर्णिम चतुर्भुज परियोजना, ग्राम सड़क योजना जैसी ऐतिहासिक पहलें आज भी उनके दूरदर्शी नेतृत्व की मिसाल हैं। उन्होंने विपक्ष के प्रति सम्मान और संवाद की जो परंपरा स्थापित की, वह आज के राजनीतिक परिवेश में और भी प्रासंगिक हो गई है। इस अवसर पर अटल जी को स्मरण करते हुए उनकी प्रसिद्ध कविताओं का पाठ भी किया गया, जिसने पूरे वातावरण को भावुक और प्रेरणादायी बना दिया। अटल जी की ये पंक्तियाँ सभी के मन में विशेष रूप से गूंजती रहीं, हार नहीं मानूंगा, रार नहीं ठानूंगा, काल के कपाल पर, लिखता-मिटाता हूँ, गीत नया गाता हूँ। कविता के माध्यम से अटल जी का संघर्षशील, आशावादी और राष्ट्र के प्रति समर्पित व्यक्तित्व उपस्थित लोगों के सामने जीवंत हो उठा। वक्ताओं ने कहा कि अटल जी की कविताएँ केवल साहित्य नहीं, बल्कि जीवन-दर्शन हैं, जो कठिन परिस्थितियों में भी आगे बढ़ने की प्रेरणा देती हैं।
कार्यक्रम में पूर्व विधायक सह प्रदेश प्रवक्ता डॉ मिथिलेश कुमार के द्वारा यह भी कहा गया कि अटल जी का राजनीतिक जीवन राजनीति में नैतिकता का उदाहरण है। वे विरोधियों के भी प्रिय थे और उनकी वाणी में कटुता के बजाय करुणा और तर्क का समावेश रहता था। उनकी एक और प्रसिद्ध पंक्ति को भी याद किया गया
आओ फिर से दिया जलाएँ, भरी दुपहरी में अँधियारा, सूरज परछाईं नापे। कार्यक्रम के अंत में उपस्थित सभी कार्यकर्ताओं ने अटल जी के आदर्शों को आत्मसात करने, राष्ट्रहित में कार्य करने तथा भाजपा की विचारधारा को जन-जन तक पहुँचाने का संकल्प लिया।
जिला भाजपा कार्यालय सीमरा में आयोजित यह कार्यक्रम अटल बिहारी वाजपेयी के प्रति श्रद्धा, सम्मान और कृतज्ञता का जीवंत उदाहरण बना, जहाँ राजनीति, कविता और राष्ट्रप्रेम एक साथ साकार होते दिखे।












