गोपालगंज में नाबालिग का अपहरण, 5 दिनों बाद भी पुलिस के हाथ खाली; सहमा पीड़ित परिवार
विजयीपुर (गोपालगंज): बिहार के गोपालगंज जिला अंतर्गत विजयीपुर थाना क्षेत्र के एक गांव से एक 15 वर्षीय नाबालिग लड़की के अपहरण का एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। घटना बीते 21 अगस्त 2026 की बताई जा रही है, जब पीड़ित पिता अपने परिवार के साथ काम पर गए हुए थे। दोपहर करीब डेढ़ बजे जब वह लंच के लिए घर लौटे, तो घर का नजारा देखकर उनके होश उड़ गए। घर का सारा सामान बिखरा पड़ा था और उनकी 15 वर्षीय बेटी लापता थी।
पीड़ित पिता के अनुसार, आस-पड़ोस के लोगों से छानबीन करने पर पता चला कि गांव के ही पांच लोग—चंदन कुमार राम (21 वर्ष), मेमधारी राम (47 वर्ष), बिगनी देवी (42 वर्ष), सीमा देवी (22 वर्ष) और मीना देवी (24 वर्ष)—जबरन उनके घर में घुसे। इन आरोपियों ने नाबालिग को डरा-धमका कर उसका अपहरण कर लिया। इतना ही नहीं, जाते-जाते आरोपी घर में रखे करीब 50 हजार रुपये मूल्य के सोने-चांदी के जेवरात (सोने का झुमका, सोने का ॐ और एक जोड़ी चांदी की पायल) भी लूट ले गए। पीड़ित ने बताया कि बेटी के बैंक खाते में भी 10 हजार रुपये जमा थे।
लड़की बेचने वाले गिरोह से जुड़े होने की आशंका, खौफ में परिवार
इस घटना ने पीड़ित परिवार को गहरे सदमे और खौफ में डाल दिया है। गांव में यह चर्चा आम है कि नामजद आरोपी कथित तौर पर लड़कियों की खरीद-बख्त (मानव तस्करी) के धंधे से जुड़े हैं। पीड़ित पिता ने अंदेशा जताया है कि उनकी मासूम बेटी के साथ कोई अनहोनी या अप्रिय घटना घटित हो सकती है, जिससे पूरा परिवार बेहद भयभीत है।
दो बार गुहार और SP के आदेश के बाद दर्ज हुई प्राथमिकी
इस संवेदनशील मामले में पुलिसिया कार्यशैली पर भी गंभीर सवाल उठ रहे हैं। पीड़ित पिता को न्याय के लिए दर-दर भटकना पड़ा। दो बार थाने में लिखित आवेदन देने के बाद भी जब कार्रवाई नहीं हुई, तब थक-हारकर पीड़ित ने पुलिस अधीक्षक (SP) विनय तिवारी से न्याय की गुहार लगाई। एसपी के कड़े निर्देश के बाद आखिरकार घटना के 26 दिन बाद यानी 16 सितंबर 2026 को विजयीपुर थाने में कांड संख्या 285/26 के तहत भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 137(2), 3(5) और 303(2) के अंतर्गत प्राथमिकी (FIR) दर्ज की गई।
जांच की कछुआ चाल से परिजनों में भारी आक्रोश
मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच की जिम्मेदारी सहायक उपनिरीक्षक (ASI) अशोक कुमार को सौंपी गई है। एएसआई अशोक कुमार ने तत्परता दिखाते हुए पीड़िता के घर पहुंचकर घटना की जानकारी ली और पूछताछ की। लेकिन परिजनों का आरोप है कि प्राथमिकी दर्ज होने के 5 दिन बीत जाने के बाद भी पुलिस की जांच सिर्फ कागजों और बयानों तक ही सीमित है, जमीन पर कोई ठोस कार्रवाई दिखाई नहीं दे रही है।
पीड़ित परिजनों का कहना है कि यदि पुलिस आरोपियों के परिजनों से कड़ाई से पेश आती और मुस्तैदी दिखाती, तो अब तक पीड़िता को सकुशल बरामद किया जा चुका होता और आरोपी पुलिस की कस्टडी में होते। फिलहाल, एक लाचार पिता अपनी बेटी की सकुशल वापसी के लिए कानून के दरवाजे पर आंखें टिकाए बैठा है, जबकि पुलिस की सुस्त चाल अपराधियों के हौसले बुलंद कर रही है।












