पहली ही बारिश में खुली 37 करोड़ के मॉडल सदर अस्पताल की पोल! मुख्य पोर्च भरभराकर गिरा, निर्माण गुणवत्ता पर उठे गंभीर सवाल
गोपालगंज ब्यूरो | आशिष रंजन श्रीवास्तव

गोपालगंज।। मानसून की पहली ही तेज बारिश ने गोपालगंज के 37 करोड़ रुपये की लागत से बने मॉडल सदर अस्पताल की निर्माण गुणवत्ता पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिया। मंगलवार सुबह हुई बारिश के दौरान अस्पताल के मुख्य प्रवेश द्वार (पोर्च) का एक हिस्सा अचानक भरभराकर गिर गया। घटना के समय अस्पताल परिसर में मरीज, उनके परिजन और अन्य लोग मौजूद थे। हादसे के बाद कुछ देर के लिए अफरा-तफरी मच गई, लेकिन राहत की बात रही कि किसी प्रकार की जनहानि नहीं हुई। घटना के बाद अस्पताल पहुंचे लोगों ने निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर सवाल उठाते हुए कहा कि करोड़ों रुपये की लागत से बने इस अस्पताल में शुरू से ही कई तकनीकी और संरचनात्मक खामियां सामने आती रही हैं। लोगों का कहना है कि यदि पहली ही तेज बारिश में भवन का हिस्सा टूटकर गिरने लगे तो निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर सवाल उठना स्वाभाविक है। अस्पताल आने वाले मरीजों और उनके परिजनों का कहना है कि भवन में लगी कई लिफ्ट लंबे समय से खराब पड़ी हैं, जिससे गंभीर मरीजों, बुजुर्गों और दिव्यांगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है। वहीं फायर सेफ्टी सिस्टम को लेकर भी पहले कई बार सवाल उठ चुके हैं।बारिश के दौरान अस्पताल के कई वार्डों में बिजली के बोर्ड और वायरिंग के पास पानी टपकने की शिकायत भी सामने आई है। इससे करंट लगने जैसी गंभीर दुर्घटना की आशंका बनी हुई है। मरीजों का कहना है कि अस्पताल जैसी संवेदनशील जगह पर ऐसी लापरवाही बेहद चिंताजनक है।
मुख्य पोर्च का हिस्सा गिरने के बाद स्थानीय लोगों ने पूरे निर्माण कार्य की उच्चस्तरीय और निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि जब करोड़ों रुपये खर्च कर आधुनिक अस्पताल बनाया गया है, तब उसकी गुणवत्ता भी उसी स्तर की होनी चाहिए। यदि निर्माण में किसी प्रकार की लापरवाही या अनियमितता हुई है तो जिम्मेदार एजेंसी और अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। सिविल सर्जन डॉ. वीरेंद्र प्रसाद ने घटना को गंभीर बताते हुए कहा कि पूरे मामले की जांच कराई जाएगी। यदि जांच में निर्माण कार्य में किसी प्रकार की लापरवाही या गड़बड़ी सामने आती है तो दोषियों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने यह भी भरोसा दिलाया कि अस्पताल में मौजूद अन्य तकनीकी कमियों को भी शीघ्र दूर करने का प्रयास किया जाएगा, ताकि मरीजों को सुरक्षित और बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं मिल सकें।












