बिशुनपुरा में श्रीकृष्ण रुक्मिणी विवाह प्रसंग सुन झूम उठे श्रद्धालु
नौत से फिरोज अंसारी की रिपोर्ट
स्थानीय प्रखंड क्षेत्र के बिशुनपुरा में चल रहे श्रीमद् भागवत कथा ज्ञान यज्ञ में छठे दिन काशी से पधारे कथावाचक आचार्य पंडित मृगेंद्र शांडिल्य ने श्री कृष्ण-रुक्मिणी विवाह प्रसंग सुनाया, जिसे सुनकर श्रद्धालु झूमने लगे। बता दें कि विगत शुक्रवार से चल रहे श्रीमद् भागवत कथा ज्ञान यज्ञ का माहौल भक्ति और आध्यात्मिक उल्लास से सराबोर है। कथा वाचक द्वारा प्रस्तुत किए जा रहे दिव्य प्रसंगों में हाल ही में भगवान श्रीकृष्ण और माता रुक्मिणी के पावन विवाह का रोमांचक वर्णन सुनकर सैकड़ों श्रद्धालु भावविभोर हो गए और झूम उठे। कथा के इस खास दिन श्रोताओं के समक्ष रुक्मिणी जी की भक्ति और प्रेम की अद्भुत गाथा प्रस्तुत की गई। कथा वाचक ने विस्तार से बताया कि विदर्भ नरेश भीष्मक की पुत्री रुक्मिणी जी का मन भगवान श्रीकृष्ण में अनुरक्त था। उन्होंने श्यामसुंदर को पति रूप में पाने के लिए पत्र लिखा और अपनी रक्षा की प्रार्थना की। श्रीकृष्ण ने रुक्मिणी जी की पुकार सुनकर तुरंत द्वारका से प्रस्थान किया और अपने साथ ले गए। इसके बाद दोनों का भव्य विवाह संपन्न हुआ, जिसमें देवताओं ने आकाश से पुष्प वर्षा की। इस प्रसंग के बीच में दो बालिकाएं भगवान श्रीकृष्ण व माता रुक्मिणी के रूप में मंच पर उपस्थित हुईं और वैदिक मंत्रोच्चारण के बिच एक-दूसरे को वरमाला पहनाया। इस दौरान कीर्तन मंडली द्वारा प्रस्तुत विवाह गीत सुनकर सभी श्रद्धालु भावविभोर हो गए, तो कुछ ‘हरि बोल’, ‘राधे-राधे’ और ‘जय श्रीकृष्ण’ के जयकारे लगाते हुए झूमने व नृत्य करने लगे। यजमान नरेंद्र मिश्र व विद्या देवी ने वस्त्र व मुद्राएं भेंट किया। वहीं पुष्पा, कनक लता, आदित्य राज तिवारी, शैलेश मिश्र, ब्रजेश मिश्र एवं उपस्थित अन्य श्रद्धालुओं द्वारा भी यथासंभव वस्त्र व मुद्राएं भेंट की गईं। सभी ने तालियां बजाकर प्रसंग का स्वागत किया। कथा वाचक आचार्य पंडित मृगेंद्र शांडिल्य ने श्रोताओं से अपील की कि श्रीकृष्ण की भक्ति अपनाकर जीवन को सार्थक बनाएं।बिशुनपुरा के इस भागवत कथा ज्ञान यज्ञ ने पूरे क्षेत्र में सकारात्मक ऊर्जा का संचार किया है। श्रद्धालु रोजाना बड़ी संख्या में पहुंच रहे हैं और कथा का आनंद ले रहे हैं। ऐसे आयोजन न केवल धार्मिक जागृति लाते हैं, बल्कि सामाजिक सद्भाव और एकता को भी मजबूत करते हैं।










